शनिवार, 27 अगस्त 2016

=१५५=

卐 सत्यराम सा 卐
जीवों का संशय पड़या, को काको तारै ।
दादू सोई शूरमा, जे आप उबारै ॥ 
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साभार ~ Rajnish Gupta
(((((((( ताकत की पहचान ))))))))
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एक बड़े तालाब से लगा एक बागीचा था. बागीचा इंतने सुंदर फूलों से भरा था कि लोग दूर-दूर से देखने आते और खुश होकर खूब तारीफ करते.
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गुलाब का एक पत्ता रोज लोगों को आते-जाते और गुलाब के फूलों की तारीफ करते देखता. उसे लगता कि हो सकता है शायद ऐसा भी एक दिन आए जब कोई उसकी भी तारीफ करे.
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बहुत दिन बीत गए लेकिन किसी ने उसकी तारीफ नहीं की. पत्ता खुद को काफी हीन महसूस करने लगा. उसके मन में तरह- तरह के विचार आने लगे.
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सभी गुलाब और अन्य फूलों की तारीफ करते नहीं थकते, पर मुझे कोई देखता तक नहीं. शायद मेरा जीवन किसी काम का नहीं. कहां ये खूबसूरत फूल और कहाँ मैं…
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ऐसे विचारों में डूबा पत्ता काफी उदास रहने लगा. दिन यूंही बीत रहे थे कि एक दिन जंगल में आंधी आई. बागीचे के पेड़-पौधे तहस-नहस होने लगे. देखते-देखते सभी फूल ज़मीन पर गिर कर निढाल हो गए. 
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पत्ता भी अपनी शाखा से टूट गया और उड़ते-उड़ते तालाब में जा गिरा. पत्ते ने देखा कि उससे कुछ ही दूर पर कहीं से एक चींटी हवा के झोंको की वजह से तालाब में आ गिरी थी और अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी. 
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चींटी प्रयास करते-करते काफी थक चुकी थी और उसे अपना अंत नजर आ रहा था.
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तभी पत्ते ने उसे आवाज़ दी- घबराओ नहीं. मैं तुम्हारी मदद कर देता हूं. पत्ते ने चींटी को अपने ऊपर बैठा लिया. आंधी रुकते-रुकते पत्ता तालाब के एक छोर पर पहुंच गया.
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चींटी जान बचने और किनारे पर पहुंच कर खुश हो गयी और बोली- आपने आज मेरी जान बचा कर बहुत बड़ा उपकार किया है. सचमुच आप महान हैं. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद !
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यह सुनकर पत्ता भावुक हो गया और बोला- धन्यवाद तो मुझे करना चाहिए क्योंकि तुम्हारी वजह से आज पहली बार मेरा सामना मेरी काबिलियत से हुआ जिससे मैं आज तक अंजान था. आज पहली बार मैंने अपने जीवन का मकसद और अपनी ताकत को पहचाना है.
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ईश्वर ने हम सब में कुछ न कुछ अलग गुण दिया है. कई बार हम खुद अपनी काबिलियत से अनजान होते हैं और कोसते रहते हैं. किसी एक काम में असफल होने का मतलब हमेशा के लिए अयोग्य होना नही है.
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खुद की काबिलियत को पहचान कर आप फिर से एक नई शुरूआत करने के लिए हर दिन स्वयं को तैयार रखना चाहिए. कई बार अचानक जो रास्ते खुलते हैं वे आपके जीवन की दिशा बदल देते हैं.
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बुझी शमा भी 
जल सकती है..
तूफ़ानो से किश्ती 
भी निकल सकती है…
हो के मायूस यूँ ना 
अपने इरादे बदल
तेरी किस्मत कभी भी 
बदल सकती है…!!
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(((((((((( जय जय श्री राधे ))))))))))
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