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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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१६ आचार्य दयारामजी ~
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भिवानी चातुर्मास ~
वि. सं. १९६३ में आचार्य दयारामजी महाराज को चातुर्मास का निमंत्रण भिवानी के मुखरामजी ने दिया । आचार्य दयारामजी महाराज शिष्य संत मंडल के सहित पधारे । भिवानी का चातुर्मास शहर के अनुरुप ही बहुत अच्छा हुआ । भिवानी के चातुर्मास से उठकर आचार्य दयारामजी महाराज ने उतराध मंडल की रामत की । रामत में उतराध मंडल के स्थानधारी साधुओं ने तथा सेवकों ने आचार्यजी का अच्छा सम्मान किया । उतराध की रामत करके शनै: शनै: भ्रमण करते हुये नारायणा दादूधाम में पधार गये ।
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उदयपुर जमात में चातुर्मास ~
वि. सं. १९६४ में आचार्य दयारामजी महाराज का चातुर्मास उदयपुर जमात हुआ । चातुर्मास के सभी कार्यक्रम अच्छी प्रकार चलते रहे । संतों का समागम अच्छा रहा । इस चातुर्मास में चातुर्मास की मर्यादाओं का पूर्णत: निर्वाह होता रहा । समाप्ति पर आचार्यजी को उनकी मर्यादा के अनुसार भेंट तथा शिष्य संत मंडल को यथा योग्य वस्त्रादि देकर सस्नेह विदा किया गया ।
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लालसोट जमात में चातुर्मास ~
वि. सं. १९६५ में आचार्य दयारामजी महाराज का चातुर्मास जमात लालसोट में मोहनदासजी के यहाँ नियत हुआ । चातुर्मास के समय आचार्यजी शिष्य संत मंडल के सहित पधारे तब जमात ने आचार्यजी का सामेला बडे ठाट बाट से किया । चातुर्मास भी बहुत अच्छा हुआ । मोहनदासजी ने संतों की सेवा अच्छी की । समाप्ति पर भी आचार्यजी को भेंट मर्यादानुसार देकर तथा शिष्य संत मंडल को वस्त्रादि देकर सबका अच्छा सम्मान किया और सस्नेह विदा किया ।
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गूलर में चातुर्मास ~
वि. सं. १९६६ में आचार्य दयारामजी महाराज को चातुर्मास का निमंत्रण रामरतनजी गूलर वालों ने दिया । आचार्य दयारामजी महाराज शिष्य संत मंडल के सहित गूलर पधारे । गूलर के ठाकुर साहब, रामरतनजी और वहाँ की जनता ने मिलकर आचार्यजी की अगवानी बाजे गाजे से कीर्तन करते हुये की । ग्राम में लाकर ठहराया । रामरतनजी अच्छे महात्मा थे । उनका प्रभाव उस प्रदेश पर अच्छा था । अत: यह चातुर्मास भी अच्छा हुआ । सभी कार्यक्रम मर्यादापूर्वक हुये थे । अंत में आचार्यजी को मर्यादानुसार भेंट तथा शिष्य संत मंडल को यथा योग्य वस्त्रादि देकर सस्नेह विदा किया ।
(क्रमशः)

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