परमगुरु ब्रह्मर्षि श्री दादूदयाल जी महाराज की अनुभव वाणी

सोमवार, 20 फ़रवरी 2017

= निष्कामी पतिव्रता का अंग =(८/१३-५)


卐 सत्यराम सा 卐
**श्री दादू अनुभव वाणी** टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
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**= निष्कामी पतिव्रता का अँग ८ =**
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तूँ सत्य, तूँ अविगत, तूँ अपरँपार, तूं निराकार, तुम्हचा१ नाम । 
दादू चा विश्राम, देहु देहु अवलम्बन राम ॥ १३ ॥ 
१३ में पतिव्रत की अखँडता के लिए प्रार्थना कर रहे हैं - प्रभो ! आप सत्य, मन इन्द्रियों के अविषय, अपरँपार, निराकार हैं । आपका१ नाम ही हमारे लिए विश्रामप्रद है । अत: हे राम ! हमें आपके नाम का ही निरँतर आश्रय दीजिये । 
दादू राम कहूं ते जोड़बा, राम कहूं ते साखि ।
राम कहूं ते गाइबा, राम कहूं ते राखि ॥ १४ ॥ 
१४ - १६ में अपनी पतिव्रत निष्ठा दिखा रहे हैं - राम नाम का उच्चारण ही हमारा भजन बनाना है । राम नाम बोलना ही साखियों का उच्चारण करना है । उच्च स्वर से राम नाम बोलना ही हमारा गायन है । राम नाम उच्चारण करना ही हमारी रक्षा है । 
दादू कुल हमारे केशवा, सगा१ तो सिरजनहार । 
जाति हमारी जगद्गुरु, परमेश्वर परिवार ॥ १५ ॥ 
हमारा वँश भगवान् केशव हैं । सम्बन्धी१ भी सृष्टिकर्त्ता ईश्वर ही हैं । सँपूर्ण जगत् में महान् प्रभु ही हमारी जाति हैं और परमेश्वर ही हमारा परिवार है ।
(क्रमशः)

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