परमगुरु ब्रह्मर्षि श्री दादूदयाल जी महाराज की अनुभव वाणी

शनिवार, 11 फ़रवरी 2017

= पंचेन्द्रियचरित्र(पंचेन्द्रियनिर्णय ३९-४०) =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
https://www.facebook.com/DADUVANI
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*(ग्रन्थ ३) पंचेन्द्रियचरित्र*
*= पंचेन्द्रियनिर्णय =*
*इहिं जिह्वा हरि गुन गावैं ।*
*तब रसना सफल कहावैं ।*
*इहिं अंग संत कौं भेटैं ।*
*तब देह सफल दुख मेटैं ॥३९॥*
तथा इस जिह्वा से हरिगुणगान करना चाहिये । तभी इसकी सार्थकता होगी । यह जिह्वारूपी अंग सन्तों को भेंट कर देना चाहिये ।(अर्थात् इस जिह्वा से एकमात्र सन्तों का गुणगान तथा उनकी वाणी का पाठ, उनके बनाये भजनों से भगवत्कीर्तन करना चाहिये ।) तभी मनुष्य के त्रिविध दुःख मिट पायेंगे ॥३९॥ 
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*कछु और न आनैं चीतैं ।*
*ऐसी बिधि इन्द्रिय जीतैं ।*
*यह इन्द्रिय कौं उपदेशा ।*
*कोउ संमुझै साधु संदेशा ॥४०॥* 
मन के द्वारा किसी सांसारिक विषय का चिन्तन न करें । इस प्रकार इन इन्द्रियों को जीता जा सकता है । यही इन्द्रियनिग्रह के लिये उपायोपदेश है । यही साधुओं द्वारा समझाया गया मार्ग है ॥४०॥
(क्रमशः)

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