परमगुरु ब्रह्मर्षि श्री दादूदयाल जी महाराज की अनुभव वाणी

सोमवार, 20 फ़रवरी 2017

= सुख समाधि(ग्रन्थ ४/१३-४) =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
https://www.facebook.com/DADUVANI
.
*(ग्रन्थ ४) सुख समाधि*
*को बकवाद करै काहू सौ,*
*मिथ्या जान्यौं बचन विलास ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥१३॥*
अभी तत्वातत्वविवेक को लेकर पण्डितों से क्यों शास्त्रार्थ किया जाय, क्योंकि वे शास्त्र तो वस्तुतः वाग्विलास मात्र है । उस में रखा क्या है ? हम तो इसी समाधिसुख में निमग्न रहना ही अच्छा समझ रहे हैं । यद्यपि इस समाधिसुख का वाणी से वर्णन वैसा ही होगा जैसे कोई खाये हुए घी के स्वाद का वर्णन करने लगे ॥१३॥ 
.
*कोऊ निंदा करै बहुत बिधि,*
*कोऊ करै प्रसंसा हास ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥१४॥*
भले ही अब कोई हमारी निन्दा करे, या कोई प्रशंसा करे या हँसी उड़ाये, हम तो इस समाधि-सुख में मग्न रहने में ही अपना भला समझते हैं ॥१४॥ 
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें