🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
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*(ग्रन्थ ४) सुख समाधि*
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*देखे नाना मते ॠषिनि के,*
*देखे बर्णाश्रम संन्यास ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥११॥*
(योगी कहता है -) इसी सुख को पाने के लिए हमने तरह तरह के आचार्यों के मतों के अनुसार अपना जीवन-आचरण बनाया, वर्णाश्रमधर्म की व्यवस्था के अनुसार संन्यासाश्रम ग्रहण कर अपने शरीर को असीम कष्ट दिया, पर आज तो जब यह समाधि-सुख(गुरुकृपा से) प्राप्त हो ही गया है तो इस सुख के द्वारा उस दुःख को हमेशा के लिए भुला लें ॥११॥
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*अर्थ धर्म अरु काम जहां लौं,*
*मोक्ष आदि सब छांडी आस ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥१२॥*
अब हमने धर्म, अर्थ काम, मोक्ष - सब की आशा-तृष्णा छोड़ दी है । अब तो हम इस समाधिसुख में निमग्न रह कर ही अपने को धन्य-धन्य समझते हैं ॥१२॥
(क्रमशः)

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