परमगुरु ब्रह्मर्षि श्री दादूदयाल जी महाराज की अनुभव वाणी

सोमवार, 24 अप्रैल 2017

= अद्भुत उपदेश(ग्रन्थ ८/३०-१) =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
https://www.facebook.com/DADUVANI
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*= अद्भुत उपदेश(ग्रन्थ ८) =*
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*तातें आयौ कहन कौं, तुमहिं सन्देशा तात ।*
*वै ठग हम कौं मारि हैं, बुरी भई यह बात ॥३०॥*
"पिताजी ! उस सज्जन से सुनते ही, आपसे कहने के लिये भागा-भागा आपके पास आ रहा हूँ । पिताजी ! यह तो बहुत बुरा हुआ । ये ठग हम लोगों को एक न एक दिन मार डालेंगे ॥३०॥
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*अब उठि बिलम न कीजिये, चलि सद्गुरु पैं जांहि ।*
*वाकै सरनै उबरि हैं, नहिं तर उबरै नांहिं ॥३१॥*
"अब पिताजी ! उठिये, देर न कीजिए । उन्हीं सद्गुरु के शरण में चलें । वे ही इस विपत्ति से छूटने का उपाय बतायेंगे । अन्यथा हम विपत्ति में फँस तो गये ही हैं, अब निकलना मुश्किल है" ॥३१॥
(क्रमशः)

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