परमगुरु ब्रह्मर्षि श्री दादूदयाल जी महाराज की अनुभव वाणी

बुधवार, 19 नवंबर 2025

पटियाला चातुर्मास

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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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८ आचार्य निर्भयरामजी
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पटियाला चातुर्मास  ~ 
वि. सं. १८६९ में ही आचार्य निर्भयरामजी का चातुर्मास पटियाले के संत तथा भक्तों के आग्रह से पटियाले में हुआ था । इस चातुर्मास में आचार्य जी के साथ उतराधे संत भी बहुत थे । पटियाला के राजा तथा प्रजा ने दादूवाणी के प्रवचन, संतों के दर्शन, जागरण, संकीर्तन, आरती, अष्टक, संत सेवा आदि पुण्य कार्यों में अति प्रीति सहित भाग लेकर अच्छा लाभ लिया था । 
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चातुर्मास का निमंत्रण देने वालों ने ११००)रु. आचार्य को भेंट किये थे । चातुर्मास समाप्ति पर महाराज से उतराधे संतों ने प्रार्थना की कि - अब आप उतराधे संतों के तथा भक्तों के ऊपर कृपा कर उतराध की रामत करें । आचार्य निर्भयरामजी महाराज ने संतों की उक्त प्रार्थना स्वीकार कर ली । 
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उतराध की रामत ~ 
फिर उन उतराधे संतों के साथ साथ ही उतराध की रामत आरंभ कर दी । उस रामत में दादूवाणी का प्रवचन सुनने में हरियाणा की धार्मिक जनता ने बहुत रुचि दिखाई । संत दर्शन, सत्संग, संत - सेवा आदि में अच्छा भाग लिया । जहां जाते थे वहां ही आनन्द की लहर उठने लगती थी । इस रामत में निर्गुण भक्ति का अच्छा प्रचार हुआ था । 
(क्रमशः)  

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