परमगुरु ब्रह्मर्षि श्री दादूदयाल जी महाराज की अनुभव वाणी

बुधवार, 31 दिसंबर 2025

*३. श्री गुरुदेव का अंग ~ १/४*

*🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏*
*🌷卐 सत्यराम सा 卐🌷*
*साभार विद्युत संस्करण ~ Tapasvi Ram Gopal Das*
*श्री रज्जबवाणी टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥*
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*३. श्री गुरुदेव का अंग ~ १/४*

भेंट अंग के अनन्तर गुरु की विशेषतादि बताने के लिये गुरुदेव का अंग कह रहे हैं ।
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*रज्जब रहिये राम में, गुरु दादू के सु प्रसाद ।*
*नातर जाता देखतो, जन्म अमोलक बाद ॥१॥*
१-१८ में गुरु की विशेषता बता रहे हैं - श्री दादू जी के कृपा प्रसाद से संसार - प्रवाह में जाने से रूक कर राम के चिन्तन में लग गये हैं, यदि दादू जी नहीं मिलते तो देखते देखते ही अमूल्य नर जन्म व्यर्थ ही चला जाता ।
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*दादू दीन दयालु गु
रु, सो मेरे शिर मौर ।*
*जन रज्जब उनकी दया, पाई निश्चल ठौर ॥२॥*
जो दीनों पर दया करने वाले गु
रु देव दादू जी हैं, वे ही मेरे शिर के मुकट हैं । उनकी दया से ही मुझ दास ने निश्चल ब्रह्म रूप स्थान प्राप्त किया है ।
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*जन रज्जब युग युग सुखी, गु
रु दादू की दाति१ ।*
*आप समागम कर लिये, भयी निरंजन जाति२ ॥३॥*
गु
रु दादू जी के उपदेश रूप दान१ से हम शिष्य युग युग प्रति सुखी रहेंगे । कारण उस उपदेश ने हमें अपने स्वरूप ब्रह्म से मिलाकर ब्रह्म ही बना दिया है । अब हमारी भी सत्ता२ निरंजन ब्रह्म रूप ही हो गई है ।
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*गुरु दादू सौ गम१ भयी, समझ्या सिरजनहार ।*
*रज्जब राते राम से, छूटे विषय विकार ॥४॥*
गुरु दादू जी की कृपा से हमारा परमार्थ में प्रवेश१ हुआ तथा परमात्मा का स्वरूप समझ में आया । अब हमारे हृदय से सभी विकार हट गये हैं हम राम के वास्तव स्वरूप में ही अनुरक्त रहते हैं ।
(क्रमशः)

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