🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
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*(ग्रन्थ ३) पंचेन्द्रियचरित्र*
*= पंचेन्द्रियनिर्णय =*
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*यह पँच इंद्रिनि कौ ज्ञाना ।*
*कौ संमुझै संत सुजाना ।*
*जो सीखै सुनै रु गावै ।*
*सो राम भक्ति फल पावै ॥४१॥*
यह पाँचों इन्द्रियों को जीतने का उपाय कोई साधु-सन्त ही जानता है ।(वही दुनिया को समझा सकता है ।) जो इस उपाय को गुरु से सीखेगा, सुनेगा, मनन करेगा वही रामभक्ति का फल(मोक्ष) पा सकेगा - यह ध्रुव सत्य है ॥४१॥
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*= ग्रन्थ-समाप्ति कालबर्णन =*
*यह संवत सोलहसै का ।*
*नवका परि करिये एका ।*
*सावन बदि दशमी भाई ।*
*कविवार कह्या संमुझाई१ ॥४२॥
संवत् १६९१ में श्रावण कृष्णा दशमी, शुक्रवार को यह ग्रन्थ समाप्त हुआ(जब कि श्रीस्वामीजी की आयु ३८ वर्ष थी ॥४२॥
(क्रमशः)

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