卐 सत्यराम सा 卐
दादू मनसा वाचा कर्मणा, साहिब का विश्वास ।
सेवक सिरजनहार का, करे कौन की आस?
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साभार ~ Abhimanyu “Krishnaa” Kashyap(G+)
**"वाह, भगवान् ने उसे दे दिया !"**
एक बार एक राजा था, वह जब भी मंदिर जाता, तो 2 फ़क़ीर उसके दाएं और बाएं बैठा करते...
दाईं तरफ़ वाला कहता : "हे भगवान, तूने राजा को बहुत कुछ दिया है, मुझे भी दे दे !"
बाईं तरफ़ वाला कहता : "ऐ राजा ! भगवान ने तुझे बहुत कुछ दिया है, मुझे भी कुछ दे दे !"
दाईं तरफ़ वाला फ़क़ीर बाईं तरफ़ वाले से कहता : "भगवान से माँग ! बेशक वह सबसे बैहतर सुनने वाला है !"
बाईं तरफ़ वाला जवाब देता : "चुप कर बेवक़ूफ़....
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एक बार राजा ने अपने मंत्री को बुलाया और कहा कि मंदिर में दाईं तरफ जो फ़क़ीर बैठता है वह हमेशा भगवान से मांगता है तो अवश्य भगवान् उसकी ज़रूर सुनेंगे, लेकिन जो बाईं तरफ बैठता है वह हमेशा मुझसे आशा करता रहता है, तो तुम ऐसा करो कि एक बड़े से बर्तन में खीर भर के उसमें स्वर्ण मुद्राएँ डाल दो और वह उसको दे आओ !
मंत्री ने ऐसा ही किया... अब वह फ़क़ीर मज़े से खीर खाते-खाते दूसरे फ़क़ीर को चिड़ाता हुआ बोला : "हुह... बड़ा आया 'भगवान् देगा...' वाला, यह देख राजा से माँगा, मिल गया ना ?"
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खाने के बाद जब इसका पेट भर गया तो इसने खीर से भरा बर्तन उस दूसरे फ़क़ीर को दे दिया और कहा : "ले पकड़... तू भी खाले, बेवक़ूफ़....
अगले दिन जब राजा आया तो देखा कि बाईं तरफ वाला फ़क़ीर तो आज भी वैसे ही बैठा है लेकिन दाईं तरफ वाला ग़ायब है !
राजा नें चौंक कर उससे पूछा : "क्या तुझे खीर से भरा बर्तन नहीं मिला ?"
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फ़क़ीर : "जी मिला ना महाराज, क्या स्वादिष्ट खीर थी, मैंने ख़ूब पेट भर कर खायी !"
राजा : "फिर ?"
फ़क़ीर : "फ़िर वह जो दूसरा फ़क़ीर यहाँ बैठता है मैंने उसको दे दी, बेवक़ूफ़ हमेशा कहता रहता है : 'भगवान् देगा, भगवान् देगा !'
राजा मुस्कुरा कर बोला : "वाह, भगवान् ने उसे दे दिया !"

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