🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
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*(ग्रन्थ ४) सुख समाधि*
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*समझ परी, संशै नहिं कोऊ,*
*सम करि जाने गृह बनबास ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥१५॥*
जब हम पूर्ण ज्ञान की स्थिति में हैं, हमें कोई संशय का तर्क-वितर्क नहीं रह गया है । आज तो हम निर्विकल्प समाधि में डूबे रह कर ही अपने को कुछ समझ रहे हैं ॥१५॥
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*काहू संग मोह नहिं ममता,*
*देखहि निर्पख भये तमास ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥१६॥*
अब हमें अपने परिवार में, कुल-कुटुम्ब में या गाँव-समाज में न कुछ मोह रह गया है, न ममता । अब तो हम निष्पक्ष रहकर दुनिया का तमाशा देखने की स्थिति में पहुँच गये, अतः अपना समय निर्विकल्प समाधि-सुखानुभव करते हुए बिता रहे हैं ॥१६॥
(क्रमशः)

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