॥ दादूराम सत्यराम ॥
**श्री दादू चरितामृत(भाग-२)**
लेखक ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
**= विन्दु ९२ =**
**= मोरड़ा पधारना =**
करड़ाला से शनैः - शनैः ब्रह्म भजन करते हुये दादूजी महाराज मोरड़ा में पधारे । दादूजी का आगमन होने से मोरड़ा के भक्तों को महान् हुआ । दादूजी महाराज तालाब पर अपने द्वारा हरे किये हुए वट वृक्ष के नीचे ही विराजे थे वहां ही सब प्रबन्ध भक्तों ने कर दिया था । अबकी बार मोरड़ा के भक्तों ने दादूजी महाराज से प्रार्थना की - स्वामीजी महाराज ! आप तो समर्थ संत हैं । आपने इस सूखे हुये वट वृक्ष को हरा कर दिया था । इस बात को हम सब जानते हैं और वर्षा बरसा कर बणजारे तथा बैलों की प्यास जनित पीड़ा हर ली थी और उस महान् संकट से उनका उद्धार किया था, यह भी हम सब जानते हैं । अतः आप हमारा भी कष्ट हर सकते हैं, इसमें हम को संशय नहीं है ।
भगवन् ! हमारे यहां खारा पानी है, यह आप भी जानते ही हैं । तालाब में पानी रहता है तब तक तो मोरड़ा ग्राम निवासियों को मीठा पानी मिलता है, तालाब का पानी सूखने पर मीठे पानी के बिना यहां के निवासियों को बड़ा कष्ट रहता है । अतः हमारी आपके चरणों में प्रार्थना है - हमारे पर मीठा पानी की कृपा करैं जिससे हमें बारह मास मीठा जल मिलता रहै । हम सब मोरड़ा निवासी आपके चरणों में पड़कर यह प्रार्थना कर रहे हैं । आप को छोड़कर हम लोग जावें भी किसके पास, मोरड़ा निवासियों के तो आप ही आश्रय हैं और आप पर हमारा पूरा-पूरा भरोसा है । आप हमारी आशा अवश्य पूर्ण करैंगे ।
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**= मोरड़ा पर मधुर जल की कृपा =**
मोरड़ा निवासियों की उक्त प्रार्थना सुनकर दादूजी महाराज ने कहा - आप लोग इस विषय की चिन्ता तो छोड़ दो, यह तुम्हारी आशा तो परमात्मा पूर्ण कर देंगे । तुम लोग इस वट वृक्ष के पास मार्ग के किनारे पर एक कूप खुदालो, उसमें मीठा पानी आयेगा और मोरड़ा ग्राम को बारह मास उस कूप से मीठा जल मिलता रहेगा । फिर ग्राम वासियों ने मिलकर शीघ्र ही वहां कूप खोद लिया, उसमें गंगा के जल के समान मधुर जल निकला । उसी कूप का जल सब ग्राम पीता है । दादूजी महाराज की कृपा से मोरड़ा ग्राम का वह संकट अनायास ही टल गया था । संत तो सर्व हितैषी होते ही हैं ।
(क्रमशः)

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