परमगुरु ब्रह्मर्षि श्री दादूदयाल जी महाराज की अनुभव वाणी

शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2017

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卐 सत्यराम सा 卐
भक्ति भक्ति सब कोइ कहै, भक्ति न जाने कोइ ।
दादू भक्ति भगवंत की, देह निरन्तर होइ ॥ 
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साभार ~ Nirmala Mishra(wtsap)

**आज का चिन्तन**
卐 भोजन भोजन चिल्लाने से क्या भूख मिट जाएगी ? पानी-पानी चिल्लाने से क्या प्यास मिट जाएगी ? प्रभु-प्रभु रटने से क्या हमें ईश्वर की प्राप्ति हो जाएगी। धर्म की चर्चा करने से नहीं धर्म का आचरण करने से दैवीय अनुभूतियाँ होंगी।

卐 लोग शब्दों की स्तुतियों से परमात्मा को रिझा रहे हैं। तुम आचरण की मौन स्तुति से प्रभु को रिझाओ। आचरण की सुगन्ध जल्दी वहाँ पहुँचती है। पश्चिम की समस्या है उन्हें पता ही नहीं है कि किस मार्ग पर चलना है ? पर यहाँ भारत में शास्त्र तुम्हें मार्ग दिखा रहे हैं उन्हें स्वीकार कर आगे बढ़ो।

卐 अपना कल्याण करो, जगत का कल्याण करो और परमात्मा की कृपा प्राप्त करो। अपने द्वारा संसार को कुछ देकर जरूर जाना, पशुओं की तरह दुनिया से वापिस मत चले जाना।

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