शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2017

= सुख समाधि(ग्रन्थ ४/७-८) =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
https://www.facebook.com/DADUVANI
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*(ग्रन्थ ४) सुख समाधि*
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*कौंण करै जप तप तीरथ ब्रत,*
*कौंण करै यम नेम उपास ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥७॥* 
तब वह योगी उस समाधि-अवस्था में पहुंचने पर समझता है कि अब जप-तप के फेर में कौन पड़े, कौन तीर्थ-ब्रत करने जाय, या यम-नियम उपासना भी कौन करे ! अब तो इस समाधिसुख में पड़े रहने में ही मौज है ॥७॥
*इडा, पिगला सुषुमन नारी,*
*को अब करै योग अभ्यास ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥८॥*
इड़ा, पिंगला सुषुम्णा नाडियों के निग्रह द्वारा हठयोग की साधना की भी अब क्या आवश्यकता रह गयी, जब इस सुख-समाधि से सभी सांसारिक दुःखों से हमारा छुटकारा हो ही गया ! ॥८॥
(क्रमशः)

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