🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
https://www.facebook.com/DADUVANI
.
*(ग्रन्थ ४) सुख समाधि*
*सुख समाधि१*
.
*तक्र त्यागि तत लियौ काढि कैं,*
*भोजन उहै अमृत कौ ग्रास ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥३॥*
अब तो साधक ने तक्ररूपी सांसारिक सुखों को छोड़कर तत्वरूपी ब्रह्म का मन्थन कर लिया है, और उसी का भोजन अपने मन को, इन्द्रियों को दे रहा है । अब उसकी सभी चित्तवृत्तियाँ उसी ब्रह्मानन्द में डूबी रहती हैं ॥३॥
.
*कण हरि नाम सार संग्रह करि,*
*और क्रिया कौ काटै घास ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥४॥*
जैसे किसान खेत में और सब घास-पात वहीं छोड़कर केवल अन्न के पौधे काट लेता है, उसी तरह साधक संसार के सुखों का मोह छोड़ कर ब्रह्मानन्द में अहिर्निश निमग्न रहता है ॥४॥
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें