🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
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*(ग्रन्थ ४) सुख समाधि*
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*कोउक दिन लौं आसन साधे,*
*कोउक दिन लौं खैंचे श्वास ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥९॥*
वह सोचता है हमने बहुत दिन इस सुख की प्रतीक्षा में तरह तरह के आसनों की साधना की, बहुत दिन प्राणायाम की विधि अपनायी । पर आज जब अन्त में वह सुख मिल ही गया तो क्यों न अब इसी में निमग्न रहा जाय ॥९॥
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*कोउक दिन लौं रजनी जागै,*
*कोउक दिन लौं फिरै उदास ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥१०॥*
हमने इस सुख के इन्तजार में बहुत सी रात जाग कर बितायीं, बहुत से दिन जंगलों में एकाकी घूमें, आज जब वह सुख हमें मिल ही गया तो क्यों न हम अब उसी में आकण्ठ डूबे रहें ! ॥१०॥
(क्रमशः)

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