रविवार, 26 फ़रवरी 2017

= सुख समाधि(ग्रन्थ ४/२५-६) =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
https://www.facebook.com/DADUVANI
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*(ग्रन्थ ४) सुख समाधि*
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*कस्तूरी कर्पूर छिपावै,*
*कैसै छानी रहै सुबास ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥२५॥*
क्या कहीं कपूर या कस्तूरी छिपाये छिप सकती है, क्या कहीं इनकी गन्ध दबी रह सकती है ! तब इस निर्विकल्प समाधि द्वारा परमानन्द के सुख का अनुभव कैसे छिपाये छिप सकता है ! ॥२५॥
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*जल तें पाला पाला ते जल,*
*आतम परआतम इकलास ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥२६॥*
जैसे जल से बर्फ बनकर भी फिर बर्फ से जल बनता रहता है, अर्थात् दोनों में एकता(ऐकात्म्य) है । यही स्थिति आत्मा-परमात्मा की है । इसको हम निर्विकल्प समाधि में दिन-रात अनुभव करते हैं ॥२६॥
(क्रमशः)

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