🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
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*(ग्रन्थ ३) पंचेन्द्रियचरित्र*
*= पंचेन्द्रियनिर्णय =*
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*हम बुद्धि प्रमान बखाना ।*
*को दोष न देहु सयाना ।*
*कहै सुन्दरदास पवित्रा ।*
*अति नीकैं पंच चरित्रा ॥४३॥*
हमने यह आख्यान यथाबुद्धि वर्णन कर दिया । कोई भी समझदार आदमी हमें दोष न दें । श्रीसुन्दरदासजी महाराज कहते हैं- यह पंचेंन्द्रियचरित्र अत्यन्त पवित्र तथा मंगलमय है ।(इसे पढ़ने-सुनने वाला सद्गति को ही प्राप्त होगा ।) ॥४३॥
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*= दोहा =*
*पंच चरित्र बखानिया, निर्मल ज्ञान प्रकास ।*
*जो ये पंचौं बसि करै, सो प्रभु सुन्दरदास ॥४४॥*
इति श्रीसुन्दरदासविरचिते पंचेन्द्रियचरित्रे पंचेन्द्रियनिर्णयो नाम भिन्नभिन्न प्रसंगः षष्ठोपदेशः ॥६॥
॥ समाप्तोऽयं पंचेन्द्रियचरित्र-ग्रन्थः । छन्दसंख्या २२१॥
महाराज कहते हैं - पंचेन्द्रिय ग्रन्थ में शुद्ध ज्ञान का उदय कैसे होता है - यह अच्छी तरह समझा दिया है । जो साधक इन पाँचों इन्द्रियों को वश में कर लेगा, वह प्रभुमय(ब्रह्ममय) हो जायगा ॥४४॥
*श्रीस्वामी सुन्दरदासजी द्वारा रचित पंचेन्द्रियचरित्र ग्रन्थ में पंचेन्द्रियनिर्णय नामक भिन्न-भिन्न प्रसंग वाला छठा उपदेश समाप्त ॥*
*यह पंचेन्द्रियचरित्र ग्रन्थ समाप्त । आगत सभी छन्दों की गणना २२१ ।*
(क्रमशः)

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