बुधवार, 1 मार्च 2017

= सुख समाधि(ग्रन्थ ४/३१-३२) =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
https://www.facebook.com/DADUVANI
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*(ग्रन्थ ४) सुख समाधि*
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*जगत क्रिया देखै ऊपर की,*
*आशय पाइ सकै नहिं तास ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥३१॥* 
ज्ञानी की इन्द्रियाँ जगत् का व्यवहार ऊपर से देखती रहती हैं, उसके चित्त को नहीं छू पाती कि वह उसमें लिप्त हो, अतः वह सुख-समाधि में ही मग्न रहता है ॥३१॥
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*सद्गुरु बहुत भांति समझायौ,*
*भक्ति सहित यह ज्ञान उल्हास ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥३२॥*
= ॥ समाप्तोऽयं सुखसमाधि ग्रन्थः ॥ = 
इस प्रकार सद्गुरु ने नाना प्रकार से यह सुखमय समाधि के ज्ञान का आनन्द मुझे समझा दिया, मैं इसे भलीभाँति समझ गया हूँ । अतः मैं अब सुखमय समाधि में निमग्न रहने में ही अपने कर्तव्य की परा काष्ठा मानता हूँ ॥३२॥ 
॥ यह सुखसमाधि नामक ग्रन्थ समाप्त ॥
(क्रमशः)

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