मंगलवार, 25 अप्रैल 2017

= अद्भुत उपदेश(ग्रन्थ ८/३२-३) =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
https://www.facebook.com/DADUVANI
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*= अद्भुत उपदेश(ग्रन्थ ८) =*
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*= पिता-पुत्र का गुरु के पास आना =*
*श्रवनूं मन कौ संग करि, लै आयौ गुरु पास ।*
*करि प्रणाम पाइनि परे, दोऊ खरे उदास ॥३२॥*
इस तरह पिता से सलाह-मशविरा कर आगे बचने का रास्ता सोचने के लिये श्रवनूं पिता को साथ लेकर वहाँ आया जहाँ गुरुदेव विराजमान थे । वहाँ आकर वे दोनों गुरुदेव को साष्टांग प्रणाम कर उदास मन हो एक तरफ खड़े हो गये ॥३२॥
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*नीचे ह्वै करि रहे, चरननि सौं लपटाइ ।*
*हम तौ ठग जानै नहीं, तुम प्रभु दिए बताइ ॥३३॥*
कुछ क्षण बाद वे विह्वल हो झुककर गुरुदेव के चरणों से लिपट गये और बोले - "हे प्रभो ! हम तो उन ठगों को जानते-पहचानते नहीं कि उनसे बचने का उपाय सोचें । आप ही उन ठगों की पहचान के कुछ चिन्ह बताइये ॥३३॥
(क्रमशः)

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