शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2025

*धूंधलीमलजी की शब्दी*

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
*https://www.facebook.com/DADUVANI*
*निगुणा गुण मानै नहीं, कोटि करै जे कोइ ।*
*दादू सब कुछ सौंपिये, सो फिर बैरी होइ ॥*
.
*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
===============
धूंधलीनाथजी की समाधि खुल गई । एक दिन धूंधलीनाथजी ने देखा कि मेरा शिष्य भिक्षा लेकर आ रहा है किन्तु उसके पैर पृथ्वी से ऊपर हैं अधर ही चला आ रहा है । उन्होंने समझा यह भिक्षा माँगकर खाने और मेरी सेवा का फल इ२ सको प्राप्त हुआ है । अतः कल भिक्षा लाने में ही जाऊँगा । दूसरे दिन धूंधलीजी भिक्षा लाने गये, किन्तु किसी ने भी भिक्षा नहीं दी । उनके साथ लोगों ने जैसे वचनों का व्यवहार किया सो घूंधलीनाथजी की शब्दियों द्वारा ही देखिये -
.
*धूंधलीमलजी की शब्दी*
ग्राम के लोगों ने कहा- "आयस१जी जाओ" ॥१॥
नाथजी बोले-
"बाबा आवत जावत बहुत जगदीठा, कछू न चढ़िया३ हाथ" ।
अब का आवण सफल सु फलिया, पाया निरंजन नाथं ॥१॥
.
ग्राम के लोगों ने कहा- "आयसजी जाओ" ॥२॥
नाथजी बोले-
"बाबा जे जाया ते जाय रहेगा, ता मैं कैसा संसा" ।
विछुरत वेला४ मरण दुहेला५, ना जाणों कत हंसा ॥२॥
.
अन्य स्थान पर जाने से लोगों ने कहा- "आयसजी बैठो" ॥३॥
नाथजी बोले-
"बाबा बैठा ऊठी ऊठा बैठी, बैठ उठ जगदीठा" ।
घर घर रावल६ भिक्षा माँगे, इक महा अमीरस मीठा" ॥३॥
.
लोगों ने कहा- "आयसजी ऊभा" ॥४॥
नाथजी बोले-
"बाबा जे ऊभा ते इकटग ऊभा, शंभु समाधि लगाई ।"
उभा रहे ही कौण फायदा, जे मन भरमे जग मांही" ॥४॥
.
लोगों ने कहा- "आयसजी आडा पड़ो ॥५॥"
नाथजी बोले-
"बाबा जे आड़ा ते गहि गुण गाढ़ा, नौ दरवाजा ताली७ ।"
योग युगति करि सन्मुख लागा, पंच पचीसों बाली८ ॥५॥
.
लोगों ने कहा- "आयसजी सोवो" ॥६॥
नाथजी बोले-
"बाबा जे सूता ते खरा विगूता९, जन्म गया अरु हार्यो" ।
काया हिरणी काल अहेड़ी, हम देखत जग मार्यो" ॥६॥
.
लोगों ने कहा- "आयसजी जागो" ॥७॥
नाथजी बोले-
"बाबा जे जाग्या ते युग युग जाग्या, कह्या सुन्या है कैसा ।
गगन मंडल में ताली१० लागी, योग पंथ है ऐसा" ॥७॥
.
लोगों ने कहा- "आयस जी मरो" ॥८॥
नाथजी बोले-
"बाबा हम भी मरणा, तुम भी मरणा, मरणा सब संसारं ।
सुर नर गण गन्धर्व भी मरणा, कोई विरला उतरे पारं" ॥८॥
.
लोगों ने कहा- "आयसजी जीवो" ॥९॥
नाथजी बोले-
"बाबा जे जीया ते मित ही जीया, मार्या ते सब मूवा ।
योग युगति करि पवना साध्या, सो अजरामर हूवा" ॥९॥
.
लोगों ने कहा- "आयसी ठगो" ॥१०॥
नाथजी बोले-
"बाबा जे ठगिया ते तो मन बैठा, अरु ठगिया यम कालं ।
हम तो योगी निरन्तर रहिया, तजिया माया जालं ॥१०॥
.
लोगों ने कहा- "आयसजी फेरी द्यौ" ॥११॥
नाथजी बोले-
"बाबा जे फेरै तो मन को फेरै, दश दरवाजा घेरै ।
अर्धउर्ध११ बिच ताली लावै, तो अठ-सिधि नौ निधि नेरै" ॥११॥
.
लोगों ने कहा- "आयसजी धन्धे लागो" ॥१२॥
नाथजी बोले-
"बाबा गोरख धन्धे१२ अहनिश इक मन, योग युगति सौं जागे ।
काल व्याल का भय हम देख्या, नाथ निरंजन लागे" ॥१२॥
.
लोगों ने कहा- "आयसजी देखो" ॥१३॥
नाथजी बोले-
"बाबा यहाँ भी दीठा वहाँ भी दीठा, दीठा सकल संसारम् ।
उलट पलट निज तत्त्व चीन्हिवा, मन से करिवा विचारम्" ॥१३॥
"जैसा करै सु पावै तैसा, रोस न कोई करणा ।
सिद्ध शब्दे को बूझै१४ नांहीं, तो बिन ही खूटी१५ मरणा" ॥१४॥
.
१. आयसजी=आदेश या नाथजी । २. दीठा=देखा । ३. चढ़िया=आया । ४. वेला=समय ।
५. दुहेला=कठिन । ६. रावल=राजा । ७. ताली=बन्द करके । ८. बाली=वृत्तियाँ रूप बालिकायें । ९. विगूता=नष्ट । १०. ताली=समाधि । ११. अर्धउर्द्ध=हृदय में । ताली=वृत्ति को रोके । १२. गोरख धन्धा=इन्द्रियों को जीतने का काम । १३. चीन्हिवा=जाना । १४. बूझे=समझे । खूटी=आयु व्यतीत हुए बिना ही ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें