शनिवार, 10 जनवरी 2026

*३. श्री गुरुदेव का अंग ~ ४१/४४*

🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏
🌷卐 सत्यराम सा 卐🌷
 *साभार विद्युत संस्करण ~ Tapasvi @Ram Gopal Das*
*श्री रज्जबवाणी टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥*
.
*३. श्री गुरुदेव का अंग ~ ४१/४४*
.
*सद्गुरु के शब्दों सुन्यो, बहुत होय उपकार ।*
*जन रज्जब जगपति मिले, छूटे सकल विकार ॥४१॥*
शास्त्र तथा संतों से सुनते आ रहे हैं कि - सद्गुरु शब्दों द्वारा महान उपकार होता है । संपूर्ण विकार हटकर परमेश्वर का साक्षात्कार होता है ।
.
सुख दाता दुख भंजता, जन रज्जब गुरु साध ।
शब्द माँहिं सांई मिलैं, दीरघ दत्त१ अगाघ ॥४२॥
संसार में गुरु और संत ही दु:ख नष्ट करके सुख देने वाले हैं उनके शब्दों में कथित ज्ञान में स्थित होने से परब्रह्म प्राप्त होते हैं । अत: उनका शब्द प्रदान करना ही महान् और अगाध दान१ है ।
.
*जेते जीव सुकृत करैं, इहि सारे संसार ।*
*तेते रज्जब ज्ञान सुन, साधुन के उपकार ॥४३॥*
इस संपूर्ण संसार में जितने भी प्राणी पुण्य कर्म करते हैं, वे सभी संतों का ज्ञानोपदेश सुन कर के ही करते हैं । अत: संसार में जो कुछ भी अच्छापन है वह सब संतों का ही उपकार है ।

*कबीर नामदेव कह गये, परम पुण्य उपकार ।*
*जन रज्जब जीव उद्धरै, शब्दों इहिं संसार ॥४४॥*
कबीर, नामदेवादि संत गुरु शब्दों से होने वाले उपकार और परम पुण्य को कह गये हैं, इस संसार में गुरु-शब्दों द्वारा ही जीवों का उद्धार होता है ।
(क्रमशः) 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें