शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

जमुनाबाई के चातुर्मास ~

*#daduji*
*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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१२ आचार्य नारायणदास जी ~
जमुनाबाई के चातुर्मास ~ 
माधोपुर की जमुनाबाई जी ने मनाया और बहुत अच्छी प्रकार चातुर्मास की व्यवस्था की । आचार्य नारायणदासजी महाराज शिष्य मंडल के सहित चातुर्मास के लिये पधारे । माधोपुर के भक्तगणों ने आचार्यजी की तथा संत मंडल की अगवानी विधि पूर्वक की और बाजे गाजे सहित संकीर्तन करते हुये लाकर नियत स्थान में ठहराया । 
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चातुर्मास का सत्संग आरंभ हो गया । चातुर्मास में जो २ कार्य होते हैं वे सब सदा की भांति होने लगे । आचार्य जी तथा संतों की सेवा का पूर्ण प्रबन्ध करा दिया गया था । संत सेवा के लिये जमुनाबाईजी उदारता से धन खर्च कर रही थी अत: संतों की सेवा में कमी आने का प्रसंग ही नहीं आता था । 
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सत्संग के कार्यक्रम प्रात: दादूवाणी प्रवचन, मध्यदिन में अन्य ग्रंथों के प्रवचन चलते थे । संकीर्तन, जागरण, नामध्वनि सभी कार्य सुचारु रुप से चल रहे थे । बडी शांति से चातुर्मास संपन्न हुआ । समाप्ति पर आचार्य जी को मर्यादानुसार भेंट अन्य कर्मचारियों को उनका दस्तूर, सब संतों को वस्त्र मर्यादानुसार देकर सस्नेह सबको विदा किया था । 
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रत्नदासजी के चातुर्मास ~ 
वि. सं. १९०८ का चातुर्मास रत्नदासजी पापडदा वालों ने मनाया था । आचार्य नारायणदासजी महाराज शिष्य मंडल के सहित रामत करते हुये समय पर पापडदा पधारे । रत्नदासजी ने विधि सहित सामेला(अगवानी) किया और लाकर स्थान पर ठहराया । चातुर्मास संबन्धी व्यवस्था सुचारु रुप से कर दी गई । चातुर्मास का कार्यक्रम यथा विधि आरंभ हो गया । 
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प्रात: समय पर दादूवाणी की कथा, कीर्तन मध्यदिन में कथा, कीर्तन, सायं आरती, अष्टक , नामध्वनि, एकादशी आदि को जागरण आदि सब सविधि होने लगे । अन्त के दिनों में आसपास के स्थानधारी संतों की तथा भक्तों की रसोइयां आने लगीं थीं । अच्छा जनसमुदाय बना रहता था । संत सेवा का अच्छा प्रबन्ध था । चातुर्मास समाप्ति पर आचार्यजी को मर्यादानुसार भेंट, संतों को वस्त्र देकर विदा किया था ।
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निवाई जमात में गमन ~ 
पापडदा का चातुर्मास करके आचार्य निवाई की जमात में पधारे । जमात में संतों का अच्छा समागम रहा । अच्छी रसोइयां हुई । सत्संग भी बहुत अच्छा हुआ । निवाई से विदा होकर रामत में मार्ग की धार्मिक जनता को निर्गुण भक्ति का उपदेश करते हुये शनै: शनै: नारायणा दादूधाम में पधार गये । 
(क्रमशः) 

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