शनिवार, 25 फ़रवरी 2017

= सुख समाधि(ग्रन्थ ४/२३-४) =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
https://www.facebook.com/DADUVANI
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*(ग्रन्थ ४) सुख समाधि*
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*देह अनित्य उपजि करि बिनसै,*
*आतम नित्य अजर अविनास ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥२३॥*
क्योंकि देह अनित्य है अतः यह उत्पन्न और विनष्ट होता रहता है, पर आत्मा तो नित्य, अजर, अमर है । अतः इसका उत्पाद-विनाश कैसे सम्भव है ! इसलिए समाधि द्वारा आत्म-सुख का अनुभव करते रहने में ही हमारा कल्याण है ॥२३॥ 
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*जाकौं अनुभव होइ सु जाणैं,*
*पायौ परमानन्द निवास ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥२४॥*
यह स्थिति ऐसी है कि जिस साधक को अनुभव द्वारा इसका साक्षात्कार हो जाय और परमानन्द की प्राप्ति हो जाय वही इस स्थिति का निर्विकल्प समाधि द्वारा सच्चा आनन्द ले सकता है ॥२४॥
(क्रमशः)

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