परमगुरु ब्रह्मर्षि श्री दादूदयाल जी महाराज की अनुभव वाणी

बुधवार, 22 फ़रवरी 2017

= सुख समाधि(ग्रन्थ ४/१७-८) =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
https://www.facebook.com/DADUVANI
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*(ग्रन्थ ४) सुख समाधि*
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*कौन करै या तन की चिंता,*
*जो प्रारब्ध सु आवै पास ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥१७॥*
अब इस शरीर को सुख सुख के साधन जुटाने की चिन्ता कौन करे ! जो कुछ प्रारब्धानुसार मिल रहा है उसी में संतुष्ट रहकर हम समाधि-सुख का भोग कर रहे हैं---यह क्या कम है ! ॥१७॥
*स्वर्ग नरक संशै नहिं कोऊ,*
*आवागमन न जम की त्रास ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥१८॥*
अब न हमें 'स्वर्ग मिलेगा या नरक'--इसकी चिन्ता है, न संसार में आने-जाने का फ़िक्र और न मौत से किसी प्रकार का डर । हम तो अब निरन्तर समाधि-सुख में मग्न रहने में ही अपना सबसे बड़ा कर्तव्य समझ बैठे हैं ॥१८॥
(क्रमशः)

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