सोमवार, 29 दिसंबर 2014

= ६६ =

#daduji
卐 सत्यराम सा 卐
भौं जल में बहि जात हुते जिन
काढ लियो अपनी कर आदू।
और संदेह मिटाय दिए सब,
कानन टेर सुनाय के नादू।
पूरण ब्रह्म प्रकाश कियो जिन,
छूट गए सब वाद-विवादू।
ऐसी कृपा जु करी हम ऊपर,
सुन्दर के उर हैं गुरु दादू॥
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Ramjibhai Jotaniya ~ जय जय श्री राम
अखंड मंडलाकारं व्याप्तं येन चराचरम।
तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्री गुरुवे नमः॥
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'''मनुष्य को कदम कदम पर गुरु की आवश्यकता होती है, वर्तमान समय में सात प्रकार के गुरुजन मिलते हैं !!
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सुचक गुरु = सिर्फ धार्मिक ग्रंथ की सूचना देते हैं !
वाचक गुरु = वर्णाश्रम, धर्म अधर्म के उपर व्याख्या करते हैं !
बोधक गुरु = सिर्फ मंत्र देते हैं !
निशिध्ध गुरु = संसार के दुख ओर नश्वरता समझा कर वैराग्य का मार्ग दिखाते हैं !
कारण गुरु = महामंत्र का आदेश दे कर सांसारिक रोग दूर करते हैं !
परम गुरु = परमात्मा के अंग संग दर्शन करा देते हैं, जो अहंकार शुन्य ओर श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ होते हैं ऐसे गुरुके ज्ञान से शिष्य का कल्याण होता है, हजारों जन्म के पुण्य से ऐसे गुरु प्राप्त होते हैं, परम गुरु मिले तो जन्म मृत्यु के चक्कर से छुटकारा मिल जाता है, जो सत्य परमात्मा के साथ जोडते हैं !!
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