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🌷*卐 श्री दादूदयालवे नम: 卐*🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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*दादू निर्गुणं नामं मई, हृदय भाव प्रवर्त्तितम् ।*
*भ्रमं कर्मं किल्विषं, माया मोहं कंपितम् ॥*
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मांदी ग्राम में उस समय अनेक उपद्रव हो रहे थे । भैरू की उपासना का अधिक प्रचार था, पशुबलि, मदिरापान मांस भक्षण आदि की भरमार थी । भयंकर रोगों का भी आक्रमण हो रहा था । सेवड़े लोग तंत्र मंत्रों के बहाने से जनता को लूट रहे थे । ग्राम के सज्जन लोग उक्त व्यवहार से व्यथित थे । वे चाहते थे कि कोई समर्थ संत यहां पधारें तब ही उक्त उपद्रव रुक सकते हैं । अतः प्रेमदासजी की महिमा सुनकर मांदी ग्राम के सज्जन उनके पास गये और उनका दर्शन करके अति हर्षित हुये । प्रणामादि करके पास बैठ गये । फिर अपने ग्राम की उक्त स्थिति सुना कर प्रार्थना की~ आप हमारे ग्राम मांदी में पधार करके ग्राम का उद्धार करें ।
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हरिदासजी = प्रेमदासजी महाराज तो सिद्धि पुरुष थे, मांदी ग्राम के भक्तों की प्रार्थना सुनकर मांदी ग्राम की संपूर्ण स्थिति को जान गये । फिर अपने शिष्य हरिदासजी को आज्ञा दी~ तुम इन भक्तों के साथ मांदी ग्राम में जाकर पाखंडियो से ग्राम की जनता को बचाओ और हरि भक्ति का प्रचार करके ग्राम का उद्धार करो । अपने गुरुदेव प्रेमदासजी की आज्ञा पाकर हरिदासजी गुरुजी को प्रणाम करके मांदी ग्राम के भक्तों के साथ मांदी ग्राम को पधारे । फिर प्रेमदासजी उस स्थान से अन्यत्र चले गये ।
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हरिदासजी ने मांदी ग्राम में आकर देखा तो घर घर में सेवडों द्वारा टामन टूमन, जंत्र मंत्र, डोरे लगाये हुये हैं और ग्राम की भोली जनता सेवडों द्वारा दुःख में पड़ी हुई है और कई भयंकर रोग भी ग्राम में फैले हुये हैं । उनको निमित्त बनाकर दंभी लोग जंत्र मंत्रादि के बहाने बना कर भोली जनता को जाल में फंसा रखा है । फिर हरिदासजी ने अपना कर्तव्य निश्चय करके ग्राम में प्रचार आरंभ किया कि-देखो सज्जनों ये जंत्र मंत्रादि करने पर भी आप लोग दुःखों से मुक्त नहीं हुये हैं । अतः मैं आप लोगों को उपाय बताता हूँ वह करो तो अवश्य वर्तमान में जो आप को दुःख सता रहे हैं, वे सब मिट जायेंगे ।
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जनता दुःख से छूटना तो चाहती ही थी । किन्तु सेवडों ने प्रचार किया कि साधु की बात मानकर यदि वर्तमान भैरव आदि की उपासना छोड़ दोगे तो भैरव रुष्ट होकर अधिक दुःख देगा । किन्तु हरिदासजी ने कहा~ भैरव आप का कुछ नहीं बिगाड़ेंगे । अवश्य ही आपको बहकाने वाले कुछ उपद्रव कर सकते हैं किन्तु भगवान् अति शीघ्र उस उपद्रव को नष्ट करके आप सबको सुख प्रदान करेंगे । आप मेरे वचनों पर विश्वास करो । हरिदासजी भी सिद्ध संत माने जाते थे ।
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अतः ग्राम के लोगों ने उनकी बात मानना स्वीकार कर लिया तब हरिदासजी ने कहा~अपने-अपने घरों से सब जंत्र मंत्र तोड़ कर फैंक दो । घर घर में हरि नाम का संकीर्तन करो, दादू वाणी का पाठ करो, सत्संग करो, सफाई से रहो । ग्राम वासियों ने हरिदासजी की आज्ञानुसार ही किया । सब जंत्र मंत्र हटा दिये । फिर दूध देने वाले पशु-गाय, भैंस बकरी आदि के स्थनों से दूध न निकल कर रक्त निकलने लगा ।
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यह देखकर लोग भयभीत हुये और कहने लगे । यह क्या हुआ ? सेवडों ने कहा~देवी देवताओं का प्रकोप हुआ है । साधु का कहना मानने से ही ऐसा हुआ है । ग्राम के सब घरों में हाहाकार मच गया । संतों की बुराई होने लगी । दंभी सेवड़े अति प्रसन्न हुये । महात्मा हरिदासजी चौपाल में थे । ग्राम के नर-नारी सब उनके पास आकर अपनी स्थिति बताने लगे ।
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हरिदासजी ने कहा~चिन्ता मत करो अभी शीघ्र ही भगवान् ठीक कर देंगे । यह कह कर अपने गुरु प्रेमदासजी तथा दादूजी का स्मरण करके अपने कमंडलु से जल लेकर “सत्यराम दादूराम” मंत्र बोलते हुये सब नर नारियों पर छिड़क दिया और अपने कमंडलु में भर-भर के के सब को जल दे दिया और कहा कि अपने सब पशुओं तथा घरों में यह जल छिड़क दो, भगवान् सब ठीक कर देंगे । जनता ने हरिदासजी की आज्ञानुसार ही किया । उससे सब उपद्रव शांत होकर ग्राम में आनन्द की लहर चल पड़ी ।
(क्रमशः)










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