*#daduji*
*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
.
वाणीपाठ ~
शताब्दी उत्सव के कार्यक्रम में एक अंग ‘श्रीदादूवाणी’ के ४०१ पाठ भी थे । पाठों का आरंभ माघ शुक्ला ५ को नारायणा दादूधाम में किया गया । इसके लिये १५ संत नियुक्त किये गये । एक पाठ अखण्ड दिन रात चलता था । शेष खुले होते थे । संत लोग उत्साह पूर्वक पाठ करने लगे ।
.
सभा मण्डप ~
शताब्दी उत्सव समिति ने सभा मण्डप योजना स्वीकृत की थी । तद्नुसार- तपस्वी चौक, विरक्तों की बारहदरी, छतरियें, बागर तथा तालाब के बीच का मैदान सभा के लिये चुना गया । तालाब से पश्चिम की ओर थोडी जगह छोडकर १५० फुट चौ़डाई व तीन सौ फुट लम्बाई का चौक उपयोग में लाया गया ।
.
पंडाल के लिए राव राजा जी सीकर, डिग्गी ठाकुर साहब, दूदू ठाकुर साहब, चौमू साहब, बडे गाँव ठाकुर साहब व नारायणा दादूधाम के तम्बू डेरे, छोलदारी कनातों का सामान प्राप्त हुआ था । इसी सामग्री से उत्तम व सुन्दर सभा मंडप की रचना हो गई थी । सभा मंडप का पूरा स्थान इतना था कि उसमें करीब सात आठ हजार व्यक्ति बैठ सकते थे ।
.
मंडप में एक मुख्य द्वार पश्चिमाभिमुख तथा दो लघु द्वार उत्तर दक्षिण थे । मंडप में बल्ली, बांस, रस्सी, सफाई व मजदूरी का ही व्यय हुआ था । वस्त्र संबन्धी व्यय बिल्कुल नहीं हुआ था । बल्लियों में भी सौ बल्ली माधवलालजी फुलेरे वालों ने उपयोग में लाने के लिए ऐसे ही दी थी ।
.
मंडप के दो भाग थे । प्रमुख(मंच) भाग, साधारण भाग । प्रमुख भाग के लिए एक चबूतरा दो फुट ऊंचा, १५० फुट लम्बा ५० फुट चौडा बनाया गया था । शेष भाग भूमि के धरातल का था । मंडप के मध्य में माननीय सन्त श्री किशनदासजी बीकानेर निवासी के सुयोग्य शिष्य स्वामी नारायणदासजी आयुर्वेदाचार्य संचालक दादूदयाल फार्मेसी बीकानेर द्वारा इस आयोजन के लिए बनवाया हुआ श्री दादूजी महाराज का छ: फुट तीन फुट का सुन्दर चित्र शोभायमान था । चित्र दादूजी महाराज का वृद्ध भगवान से उपदेश ग्रहण करते समय का था ।
.
दादू वाणी की महत्व पूर्ण साखियों के बोर्ड स्थान- २ पर लगे हुये थे । बावन थामों की नामावली व सिद्ध महात्मा योगी, तपस्वी, शूरवीर, विद्वान, भजनीक, मंडलेश्वर, कला- विदों की सूचियें सम्प्रदाय के महान् अतीत की स्मृति को जाग्रत कर रही थी । मंडप की चार दिवारी कनातों की थी । इसकी सब कनातें दूदू ठाकुर साहब से प्राप्त हुई थीं ।
.
सभा मंडप के निर्माण में सबसे अधिक सहायता दूदू ठाकुर साहब से प्राप्त हुई थीं । मंडप के आगे, पश्चिम में, दक्षिण में व उत्तर में तम्बू डेरे थे व छोल दारियों की पंक्तियें लगाई गई थीं । विशेष अतिथियों के लिये कानडदासजी के चौभीते में डेरे, छोलदारियों का प्रबन्ध किया था ।
.
गृहस्थ अतिथियों के लिए व गणमान्य अतिथियों के लिए अन्य कई स्थानों की व्यवस्था की गई थी । कानडदासजी का चौभीता, महात्मा हरजीरामजी का महल, तपस्वी चौक से स्वामी रतिरामजी की हवेली तक के सम्पूर्ण स्थानों तक शताब्दी उत्सव व्याप्त था । सभा मंडप से राम चौक तक ध्वजा पताकायें लहरा रही थीं । माघ शु. १३ से फा. शु. ३ तक सभा मंडप बन गया था ।
(क्रमशः)

















