🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷*卐 श्री दादूदयालवे नम: 卐*🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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*दादू मार्ग महर का, सुखी सहज सौं जाइ ।*
*भवसागर तैं काढ कर, अपणे लिये बुलाइ ॥*
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५~ आप शरीर पर अधिक वस्त्र नहीं रखते थे, एक कौपीन ही रखते थे । पंच केश रखते थे । शरीर से दुर्बल थे । योगियों के शरीर के सामान ही आपका शरीर तेज संपन्न था । आप रात्रि में भजन के समय अपनी जटा को बेरड़ी की शाखा में बांधकर भजन करते थे आप लगभग ७२ वर्ष के हो गये थे तब वि. सं . अ९७० चैत्र बदी ३ को ब्रह्मलीन हुये थे । आपके ब्रह्मलीन होने के समय नावां नगर में केशर की वर्षा हुई थी । समस्त नगर के नर नारियों के कपड़े पीले हो गये थे । दीवालें पत्थर आदि जो भी मैदान में वस्तु थीं वे सब उस समय केशर के रंग में रंजित हो गई थीं । इस घटना को देखने वाले वृद्ध पुरुषों ने मुझे कहा था, तथा नावां नगर में यह बात अति प्रसिद्ध है कहा भी है~
संतन का सुर भी करत, तन त्यागत सत्कार ।
मोतिराम तन तजत की, केशर की बोछार ।६२। दृ.त ११।
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आपका दाह संस्कार नावां नगर की पूर्व की ओर जोगियों के आश्रम में किया गया था । वहां चन्दन की चिता बनाई गई थी । उस स्थल पर चन्दन किसने पहुँचाया था, इसका पत्ता नहीं लगा । यह भी एक विचित्र घटना थी, कारण~ नावां ग्राम में तो इतना चन्दन मिलना अति कठिन ही नहीं, असंभव था । आपकी समाधि पर प्रति वर्ष चैत्र बदी ३ को बड़ी धूम धाम से मेला लगता है । और भावुकों की भावनानुसार आज भी कामनायें पूर्ण होती है । आप महान् संत हुये हैं ।
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*कृपारामजी*
५~ कृपारामजी वैद्य थे । ये नावां से नारायणा में आ गये थे और नारायणा आने के पश्चात् इनकी बहुत प्रतिष्ठा व ख्याति हो गई थी । ये माने हुये साधु वैद्य थे । चिकित्सा में ये अति कुशल थे । इस कार्य में इनको अच्छा यश मिलता था ।
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*पं भूधरदासजी*
पं. भूधरदासजी भैराणा के साधु झारवोड़जी के शिष्य थे, फिर ये खालसा वालों में आ गये थे । किन्तु भूधरदासजी ने मुझे अपने को आचार्य हरजीरामजी के शिष्य बालुरामजी का शिष्य बताया है । आप दादूवाणी, भागवत, गीता आदि की कथा करते थे । आचार्य दयारामजी, रामलालजी प्रकाशदेवजी के आगे कथा करते रहे थे । ये ही वैद्य कृपारामजी के उत्तराधिकारी बने । ये वैद्य भी हैं । चिकित्सा भी अच्छी करते हैं । आपकी आयु लगभग ९५ वर्ष की है । आप वृद्ध संतों की गणना में हैं । आप सामाजिक साहित्य से परिचित हैं । आप का वर्तमान निवास स्थान नारायणा दादू मंदिर के पीछे के चौक के बाहर द्वार पर है । आप अच्छे संत हैं ।
(क्रमशः)








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