🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷*卐 श्री दादूदयालवे नम: 卐*🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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*दादू एता अविगत आप थैं,*
*साधों का अधिकार ।*
*चौरासी लख जीव का, तन मन फेरि सँवार ॥*
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पश्चात् सामोद के रावलजी तथा जयपुर नरेश रामसिंहजी भी हरजीरामजी के पास आने लगे । पर्वत के ऊपर दादू मंदिर तथा अच्छा स्थान जयपुर नरेश और समोद रावलजी ने ही हरजीरामजी के त्याग, तपस्या और चमत्कारों से प्रभावित होकर बनवाया था । स्थान के पास ही जल के कुंड हैं । बड़ा सुन्दर स्थान है । पर्वत के ऊपर वाले मंदिर में हरजीरामजी के सामने बैठे हुये जयपुर नरेश रामसिंहजी और सामोद रावल का चित्र भी था किन्तु कुछ समय स्थान सूना रहा इससे उस चित्र को कोई ले गया ।
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सामोद के तत्कालीन रावल की रक्षा अंग्रेजों से हरजीरामजी ने की थी । इससे हरजीरामजी पर बहुत श्रद्धा रखते थे और उस समय सामोद रावलजी जयपुर नरेश के मंत्री थे । जयपुर नरेश रामसिंहजी तथा जयपुर राज्य के सामन्त हरजीरामजी पर अत्यन्त श्रद्धा रखते थे । हरजीरामजी की कई चमत्कार पूर्ण कथायें भी गौड़जी के गुढ़े में प्रसिद्ध है~
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१~ तोलारामजी संत गौड़जी के गुढ़े में ही रहते थे । तोलारामजी की बगीची वहां अब भी है । एक दिन तोलारामजी के पास कई सज्जन बैठे थे । उनमें एक सज्जन की अंगुली में विष का कांटा निकल रहा था । वह उसकी पीड़ा से बहुत दुःखी था । उसने तोलारामजी से प्रार्थना की । तब तोलारामजी ने कहा- जाकर कालिया(हरजीरामजी) की गुदा में दे दे ठीक हो जायगा । फिर वह हरजीरामजी के पास गया किन्तु संकोचवश कह न सका । तब सिद्ध हरजीरामजी ने ही कहा तुम अपनी अंगुली मेरी गुदा में दे दो । तब तत्काल उसने अपनी अंगुली हरजीरामजी के नितम्बों के बीच में दे दी । फिर तो उसी समय उसका विषकांटा जन्यकष्ट नष्ट हो गया । फिर वह धन्यवाद देते हुये अपने घर चला गया ॥
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२~ एक दिन हरजीरामजी भजन कर रहे थे । उस समय कुछ व्यक्ति उनके पत्थर मारने लगे । पहले तो हरजीरामजी ने सोचा अबोध मनुष्य हैं रुक जायेंगे । किन्तु वे मारते ही रहे । तब हरजीरामजी ने कहा~भाइयों तुम दूसरों पर पत्थर डाल रहे हो, इसका फल यही होगा कि तुम्हारे पर पत्थर ही पड़ेंगे । फिर उन पत्थर डालने वालों की खेती पर भारी बर्फ के पत्थर पड़े जिनसे सब खेती नष्ट हो गई । तब वहां के लोग हरजीरामजी से डरने लगे थे । फिर हरजीराम के भजन के समय कोई विघ्न नहीं हुआ ।
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३~ तत्कालीन चोमू ठाकुर साहब और सामोद के तत्कालीन रावलजी पर १४ के गदर में अंग्रेजों के मरवाने का दोष लगाया गया था । जयपुर नरेश रामसिंहजी ने उन दोनों को कहा हरजीरामजी के शरण जाओ । अंग्रेजों के कोप से हरजीरामजी की कृपा से ही बचोगे । वे गये । हरजीरामजी ने उनको आश्वासन दिया था और वे सर्वथा बाख गये थे । हरजीरामजी ने वाइसराय की मेम को स्वपन में दोनों निर्दोष हैं बताकर बचाया था । अतः उनकी हरजीरामजी पर अत्यन्त श्रद्धा थी ।
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४~ चोमू ठाकुर साहब ने गुफा वाली गढ़ी बनाई उसके विषय में गौड़जी के गुढ़ा के वृद्ध पुरुष कहते हैं । चोमू ठाकुर की कुछ भूमि जयपुर नरेश रामसिंहजी ने खालसे करली थी । उसको पुनः प्राप्त करने की इच्छा से चोमू ठाकुर हरजीरामजी के पास गुढ़ा गये थे । हरजीरामजी ने उनको आश्वासन दिया था कि शीघ्र ही तुमको मिल जायगी । वह मिल गई तब चोमू ठाकुर कुछ धन लेकर आये थे । हरजीरामजी ने धन लेना स्वीकार नहीं किया किन्तु विशेष आग्रह करने से कह दिया कि यहां कुछ बना दे । इससे चोमू ठाकुर ने गुफा वाली गढ़ी बनवाई थी । फिर उस गुफा में हरजीरामजी भजन करते थे ।
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५~ रिणी राजगढ़ का आयकर तत्कालीन बीकानेर नरेश हरजीरामजी के सेवा में गौड़जी के गुढ़े भेजा करते थे । यह किस चमत्कार से भेजना आरंभ किया था, इसका पता नहीं लगा । किन्तु यह तो निश्चय ही है कि बिना किसी कारण विशेष के तो राजा लोग ऐसा करते नहीं हैं ।
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६~ तत्कालीन खेतड़ी नरेश बहुत बीमार हो रहे थे । जब औषधियों से कुछ लाभ नहीं हुआ तो राजा ने हरजीरामजी को बुलाने घुड़सवार और उनको लाने के लिये सवारी भेजी । घुड़सवार तथा सवारी हरजीरामजी के पास आये तब ग्राम में यह बात शीघ्र ही फ़ैल गई । तोलारामजी के पास भी पहुँच गई । हरजीरामजी जब खेतड़ी जाने लगे तब उनके गुरु भाई तोलारामजी ने हरजीरामजी को एक मानव के द्वारा कहलाया~ कि हरजीरामजी को मेरी ओर से कहो- कि आप जाते तो हैं किन्तु आपके पहुँचने के पहले ही राजा मर जायगा । अतः अपनी आयु में से कुछ आयु उसे देकर जीवित करके ही आना । मरा छोड़कर आओगे तो साधुओं की बदनामी होगी ।
(क्रमशः)





















