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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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अध्याय १६, आचार्य पर्व -
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आचार्यों की शिष्य परंपरा ~
गद्दी पर बैठने वाले आचार्यों के भी कई शिष्य होते थे । उनमें से एक तो गद्दी का अधिकारी होता था । किन्तु अन्य भी शिष्य होते थे और उनके शिष्यों के भी शिष्य हो जाते थे । वे सब अपने- अपने स्थान बनाकर स्वतंत्र रहते थे । गरीबदासजी महाराज ने जीवितावस्था में गद्दी त्याग दी थी ।
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इससे उनकी शिष्य परंपरा भी चल पडी थी । मसकीनदासजी की शिष्य परंपरा गद्दी पर चलती रही किन्तु आचार्यो के एक से भिन्न शिष्यों की परंपरा भिन्न चली । इस प्रकार आचार्य गद्दी पर बैठने वाले गरीबदासोत और मसकीनदासोत और बाई जी का थांभा ये तीन थांभे खास के होने से ‘खालसा’ कहलाने लगे ।
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इन तीनों के स्थान नारायणा में ही थे । वहाँ ही बढने लगे । जब इनकी संख्या अधिक बढने लगी तब आगे चलकर उक्त तीनों ही थांभों के संत नारायणा दादूधाम से बाहर जाकर अन्य ग्रामों में भी अपने साधन धाम बनाकर भजन करने लगे । तीनों ही थांभों के आदि महात्मा दादूजी महाराज के मानस पुत्र होने से खास थे अत: अन्य थांभों के साधु संत इन तीनों को खालसा कहकर अन्य सब से इन तीनों का अधिक सम्मान करते थे ।
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इन की वृद्धि होती गई त्यों ही इनके स्थान भी बढते गये । नारायणा में भी इनके अनेक स्थान बन गये । इन में अनेक विद्वान, भजनीक, तपस्वी, त्यागी, संगीतज्ञ कथा वाचक तथा परंपरा के जानकार विशेष रुप में हुये हैं । इनका भेष-भूषा पहले कान तक टोपा तथा कपाली टोपी, चौला, और कटि वस्त्र था । किन्तु अब वैसा नहीं रहा है । टोपी के स्थान पर साफा बाँधने लगे हैं । चौले के स्थान पर कोट, कमीज और कटिवस्त्र के स्थान पर धोती बाँधी जाती है ।
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वर्तमान में भी खालसा वर्ग के अनेक स्थान अच्छी स्थिति में हैं । पहले तो इस वर्ग के स्थानों तथा संतों की संख्या बहुत अच्छी थी । इनके स्थान जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, अलवर आदि कई राज्यों में हैं । गरीबदासजी की परंपरा का थांभायती स्थान नारायणा दादूधाम में ही है । मसकीनदासजी की परंपरा आचार्य गद्दी पर चल ही रही है ।
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बाईजी के थांभे का मुख्य हरमाडा तथा चुरु में था किन्तु चुरु का स्थान आबाद नहीं है हरमाडे का स्थान है । उक्त तीनों ही थांभों में अच्छे-अच्छे महापुरुष हुये हैं । उनका यथा प्राप्त परिचय ‘खालसा’ पर्व २ में दिया जावेगा । इस आचार्य पर्व में आचार्यों का यथा प्राप्त प्रसंग दे दिया गया है । नारायणा दादूधाम के पीठाचार्यों की गुण गरिमा का परिचय देकर अब आचार्य पर्व १ का उपसंहार किया जा रहा है ।
(क्रमशः)
















