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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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१६ आचार्य दयारामजी ~
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सूरत नगर में चातुर्मास ~
वि. सं. १९७४ में आचार्य दयारामजी को चातुर्मास का निमंत्रण मोतीरामजी सूरत वालों ने दिया था । अत: आचार्य दयारामजी महाराज अपने शिष्य मंडल सहित चातुर्मास के लिये सूरत पधारे । मोतीरामजी ने अपने भक्तों सहित आकर बडे ठाट बाट से आचार्य दयारामजी की अगवानी की । मर्यादापूर्वक स्थान पर ले गये ।
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मोतीरामजी विद्वान् संत थे । अत: उनके भक्त भी बहुत थे । इससे भक्तों ने आचार्यजी की अच्छी सेवा की । चातुर्मास मर्यादापूर्वक बहुत अच्छा हुआ । चातुर्मास की समाप्ति पर आचार्य दयारामजी महाराज को मर्यादा के अनुसार भेंट दी तथा साधुओं को यथायोग्य वस्त्र देकर सस्नेह विदा किया ।
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हरमाडा में चातुर्मास ~
वि. सं. १९७५ में आचार्य दयारामजी महाराज को चातुर्मास का निमंत्रण सुखरामदासजी हरमाडा वालों ने दिया । आचार्य दयारामजी महाराज चातुर्मास में शिष्य मंडल के सहित सुखरामदासजी ने आचार्यजी की अच्छी अगवानी करी फिर स्थान पर ले गये । चातुर्मास की सब व्यवस्था सुन्दर रुप से कर दी गई । अच्छा चातुर्मास हुआ । अंत में मर्यादा अनुसार आचार्यजी को भेंट, शिष्य संत मंडल को वस्त्रादि देकर विदा किया ।
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जयपुर गमन ~
वि. सं. १९७६ में कार्तिक कृष्णा ७ को आचार्य दयारामजी महाराज अपने पूरे शिष्य संत मंडल के सहित जयपुर पधारे । अपनी मर्यादानुसार जयपुर नरेश को अपने आने की सूचना दी । सूचना मिलने पर आचार्यजी की अगवानी के लिये मरदानी ड्यौढी के हाकिम चन्दूलालजी और जनानी ड्यौढी के हाकिम नायब प्यारेलालजी पचरंग, हाथी, घोडा नक्कारा व अरबी बाजा लेकर तार बंगला के पास आकर सामेला किया और मर्यादापूर्वक हाथी पर आचार्यजी को बैठाकर बडे ठाट बाट से चले और ‘दादूद्वारा स्थल’ में डेरा दिलवाया ।
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कार्तिक शुक्ला २ को जयपुर नरेश ने निमंत्रण देकर आदर पूर्वक बुलाया । आचार्यजी को पालकी में बैठाकर लवाजमा- घोडा रथ बाजा आदि के सहित सांगानेर दरवाजा होकर त्रिपोलिया से ड्यौढी के पास से बादल महल में उतरकर चन्द्र महल पधारे । जयपुर नरेश माधवसिंहजी ने खडे होकर सत्कार किया । चौके पर आचार्य दयारामजी महाराज को बैठाकर उनके सामने जयपुर नरेश माधवसिंहजी बैठे ।
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भेंट करके बोले- भगवन् ! मैं स्वयं ही आपके डेरे पर आकर दर्शन करता किन्तु जुकाम हो जाने से मैं नहीं आ सका अत: आपको यहाँ बुलाने का कष्ट दिया । उस समय नवाब साहिब, पुरोहित गोपीनाथजी, बाबू अविनाश चन्द्रजी, ख्वासजी आदि गण्य मान्य अधिकारी उपस्थित थे । फिर कुछ सत्संग करके पुन: आदर सहित आचार्यजी को स्थान पर पहुँचा दिया ।
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कार्तिक शुक्ला ५ मी को रावल संग्रामसिंहजी, चोमू ठाकुर देवीसिंहजी कुमारी सहित दर्शनार्थ डेरे पर आये । जयपुर नरेश माधवसिंहजी ने दूसरे दिन रसोई दी । जयपुर नरेश की आज्ञा से दरवाजा खुला दिया गया इससे हाथी की सवारी से आचार्य दयारामजी पधारे । शिष्य संत मंडल के सहित आचार्यजी को जिमाकर मर्यादानुसार स्वर्ण मुद्रा भेंट दी । उक्त प्रकार ही माजी साहिब, डिग्गी ठाकुर संग्रामसिंहजी, चोमू ठाकुर दैवीसिंहजी, सामोद के रावलजी, अचरोल ठाकुर केशरीसिंहजी आदि महानुभावों की रसोइयां तथा भेंट हुई ।
(क्रमशः)



















