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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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१५ आचार्य हरजीराम जी ~
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पाटण में चातुर्मास ~
वि. सं. १९५३ में जीवणदासजी पाटण वालों ने आचार्य हरजीरामजी को चातुर्मास का निमंत्रण दिया । आचार्यजी ने स्वीकार कर लिया । चातुर्मास का समय समीप आने पर आचार्य हरजीरामजी महाराज अपने शिष्य मंडल के सहित पाटण पधारे ।
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जीवणदासजी भक्त मंडल के सहित आचार्य हरजीरामजी की अगवानी करने आये और मर्यादापूर्वक भेंट चढाकर सत्यराम बोलते हुये दंडवत की और आचार्यजी को लाकर नियत स्थान में ठहराया, चातुर्मास आरंभ हो गया ।
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समाप्ति पर जीवणदासजी ने आचार्यजी को मर्यादा के अनुसार भेंट तथा साधुओं को यथायोग्य वस्त्रादि देकर सस्नेह विदा किया । पाटण से विदा होकर आचार्य हरजीरामजी महाराज शिष्य संत मंडल के सहित मार्ग की धार्मिक जनता को उपदेश देते हुये नारायणा दादूधाम में पधार गये ।
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नीमेडा चातुर्मास ~
वि. सं. १९५४ में आचार्य हरजीरामजी महाराज को चातुर्मास का निमंत्रण नीमेडा के हरचरणजी ने दिया । आचार्यजी ने स्वीकार कर लिया । चातुर्मास का समय समीप आया तब आचार्यजी शिष्य संत मंडल के सहित नीमेडा पधारे । हरचरणजी ने आचार्यजी की अगवानी की और स्थान लाकर ठहराया चातुर्मास आरंभ हो गया ।
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चातुर्मास के कार्यक्रम अच्छी प्रकार चलने लगे । अच्छा चातुर्मास हुआ । समाप्ति पर हरचरणजी ने मर्यादानुसार आचार्यजी को भेंट तथा शिष्य संत मंडल को यथायोग्य वस्त्रादि देकर सस्नेह विदा किया । नीमेडा से विदा होकर आचार्य हरजीरामजी महाराज शिष्य संत मंडल के सहित नारायणा दादूधाम में पधार गये ।
(क्रमशः)






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