卐 सत्यराम सा 卐
**श्री दादू अनुभव वाणी** टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
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**= निष्कामी पतिव्रता का अँग ८ =**
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तुम्हीं आमची पूजा, तुम्हीं आमची पाती ।
तुम्हीं आमचा तीर्थ, तुम्हीं आमची जाती ॥७॥
आप ही हमारी अर्चना भक्ति और अर्चना में उपयोगी तुलसी पत्र, तीर्थ जल तथा आपके धामों की यात्रा भी हमारे आप ही हैं ।
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तुम्हीं आमचा नाद, तुम्हीं आमचा भेद ।
तुम्हीं आमचा पुराण, तुम्हीं आमचा वेद ॥८॥
आप ही हमारे बजाने का नाद व अनाहत नाद हैं । आप ही हमारे जानने योग्य रहस्य हैं । आप ही हमारे प्राचीन कथा रूप पुराण हैं । और आप ही आप का ज्ञान रूप वेद हैं ।
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तुम्हीं आमची युक्ति, तुम्हीं आमचा योग ।
तुम्हीं आमचा वैराग, तुम्हीं आमचा भोग ॥९॥
आप ही हमारे मोक्ष साधन में सहायक युक्तियां हैं । आप ही हमारे वृत्ति निरोध रूप योग हैं । आप ही हमारे अनासक्ति रूप वैराग्य हैं । आप ही हमारे इष्ट वस्तु रूप भोग हैं ।
(क्रमशः)

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