🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
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*(ग्रन्थ ४) सुख समाधि*
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*कीयौ श्रवण मनन पुनि कीयौ,*
*ता पीछै कीयौ निदिध्यास ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥१९॥*
हमारी शास्त्र के श्रवण-मनन-निदिध्यासन की अवस्था भी बीत चुकी, अब तो समाधि-सुख में ही हम मस्त हैं ॥१९॥
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*बार बार अब कासौं कहिये,*
*हूवौ हिरदय कवल विगास ।*
*घी सौ घौंटि रह्यौ घट भीतरि,*
*सुख सौं सोवै सुन्दरदास ॥२०॥*
अब हम किसके सामने ढिंढोरा पीटने जाँय कि ज्ञानरूपी सूर्य के प्रकाश से हमारा ह्रत्कमल विकसित हो चुका है और हम निर्विकल्पसमाधि सुख में आकण्ठ निमग्न हैं ॥२०॥
(क्रमशः)

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