🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान,
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
https://www.facebook.com/DADUVANI
.
*= अजब ख्याल अष्टक(ग्रन्थ २५) =*
.
{यह अजब ख्याल भ्रष्टक भी पीरमुरीद अष्टक की तरह सूफी फकीरों की भाषा और पद्धति पर लिखा गया है । इसमें भी फारसी अरबी के शब्द प्रयुक्त हुए हैं । अजब ख्याल कहने से यह प्रयोजन है कि यह दुनिया अजायबान(आश्चर्य) से भरी हुई है मानों एक ख्यालखाना(कल्पनालोक) अजायब घर है और उस मालिक परवरदिगार की महिमा सोचते-विचारते बहुत आश्चर्य प्रगट होते हैं बुद्धि कुछ काम नहीं करती । आश्चर्य तभी होता है जब साधारण से विशेष व अतिविशेष अद्भुत चमत्कारी पदार्थ दृष्टिगत हों}
.
*= दोहा =*
सिजदा१ सिरजनहार२ कौं मुरसिद३ कौं ताजीम४ ।
सुन्दर तालिब५ करत है, बन्दौं६ को तसलीम७ ॥१॥
(१. सिजदा=दण्डवत ।) (२. सिरजनहार=स्त्रष्टा ।)
(३. मुरसिद=मुरशिद, गुरु ।) (४. तालिब=शिष्य ।)
(५. ताजीम=इज्जत और सद्भाव से शिष्टाचार ।)
(६. बन्दौं=ईश्वरभक्त, साधु सन्तजन ।) (७. तसलीम=प्रणाम ।)
महात्मा कहते हैं - इस ग्रन्थ को प्रारंभ करने से पूर्व(मंगलाचरण के रूप में मैं शिष्य सुन्दरदास अपने स्रष्टा(सिरजनहार = पैदा करनेवाले) को दण्डवत प्रणाम और सद्गुरु को सादर प्रणाम करता हूं । इसी तरह सब सन्तों का नम्रता के साथ आदर करना अपना कर्तव्य समझता हूं ॥१॥
.
*सुन्दर इस औजूद८ मौं९, अजब चीज है बाद१० ।*
*तब पावै इस भेद कौं, खूब मिलै उस्ताद ॥२॥*
(८. औजूद = वजूद, शरीर, काया ।) (मौं९ = मैं, अन्दर ।)
(१०. वाद = कलाम, वचन ।)
श्री सुन्दरदास जी कहते हैं - इस मनुष्य शरीर को पाकर सबसे अद्भुत बात होती है-गुरु का उपदेश । जिज्ञासु परम गुह्य तत्व का भेद(ज्ञान)तभी पा सकता है जब उसे सद्गुरु मिले ॥२॥
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें