#daduji
॥ दादूराम सत्यराम ॥
*श्री दादू अनुभव वाणी*
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
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*विनती का अँग ३४*
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*करुणा*
तुमको भावे और कुछ, हम कुछ कीया और ।
मिहर करो तो छूटिये, नहीं तो नाँहीं ठौर ॥७९॥
७८ - ८१ में करुणा दिखा रहे हैं - भगवन् ! आपको तो भक्ति, वैराग्यादि कुछ और प्रिय लगते हैं और हमने पर - पीड़न, विषयासक्ति आदि कुछ अन्य ही कार्य किये हैं । अत: अब आप ही कृपा करें तो, हम जन्मादि सँसार से छूट सकते हैं, नहीं तो हमें परम धाम कभी भी नहीं मिलेगा ।
(क्रमशः)

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