रविवार, 19 अप्रैल 2020

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🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*दादू रमता राम सौं, खेलैं अन्तर मांहि ।*
*उलट समाना आप में, सो सुख कतहुँ नांहि ॥*
*परगट खेलैं पीव सौं, अगम अगोचर ठांव ।*
*एक पलक का देखणा, जीवण मरण का नांव ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ परिचय का अंग)*
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *अर्चना भक्ति*
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बिकानेर राज्य के गारबदेसर ताजीमी ठिकाने के ठाकुर किशनसिंह जी किसी यात्रा में महाराजा के साथ जा रहे थे । पूजा का समय हो जाने से वे कपड़ा ओढ के घोड़े पर चलते चलते ही मानस पूजा करने लगे । पूजा समाप्त हो चुकी थी और भगवान् के दही का भोग लगा रहे थे । इसी समय महाराजा ने उन्हें पुकारा जब नहीं बोले, तब अपना घोड़ा उनके पास ले जाकर उनका वस्त्र पकड़ के खींचा । इससे उनका हाथ हिल गया और हाथ के हिलने से दही के प्याले से दही ढुल गया । दही को गिरता देख कर के राजा ने पूछा, तब किशनसिंहजी बोले - मैं मानस पुजा करके दही का भोग लगा रहा था । आपके हिलाने से वह गिरा है और हरि इच्छा से आपको प्रत्यक्ष दीख गया है । इससे सूचित होता है कि कभी कभी मानस पूजा भी प्रत्यक्ष दीख पड़ती है ।
मानस पुजा भी कभी, हो जाती प्रत्यक्ष ।
किशनसिंह दधि भोग को, नृप ने लखा प्रत्यक्ष ॥१४९॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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