बुधवार, 6 मई 2020

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*धरती अम्बर रात दिन, रवि शशि नावैं शीश ।*
*दादू बलि बलि वारणें, जे सुमिरैं जगदीश ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ साधु का अंग)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *भक्त*
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उज्जैन में पूर्वकाल में कुंभ मेले पर मरी(महामारी) पड़ा करती थी । हजारों मनुष्य मरते थे । दादूपंथी भक्त संत पाखाणदासजी ने मर्यादा बांध दी थी कि - 'यदि राणिखों के बाग में कड़ाही नही चढाई जायेगी तो महामारी के रोग का असर बाग में नहीं होगा ।' इस मर्यादा का पालन माहामारी भी करती थी उस बाग में वह गद(रोग) नहीं होता था । इससे सूचित होता है कि भक्त की मर्यादा को रोग भी भंग नहीं करते ।
भक्तों की मर्यादा को, रोग न करते भंग ।
राणीखां के बाग में, बढत न गद का रग ॥३८६॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^

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