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*दादू दुखिया तब लगै, जब लग नाम न लेहि ।*
*तब ही पावन परम सुख, मेरी जीवनि येहि ॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *३ स्मरण भक्ति*
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*॥ नाम जप का प्रत्यक्ष फल ॥*
नाम जाप का प्रत्यक्ष फल, कहीं सु देखा जाय ।
बचे विभूति सहज ही, माधव में मन लाय ॥११४॥
दृष्टांत कथा – कलकत्ते की बात है, विभूतिभूषण के मास्टर प्रायः लड़कों को बहुत पीटा करते थे और अपने जाति वालों को दूसरों से दूना पीटते थे । विभूतिभूषण और और उनके एक भतीजे मास्टर की जाति के थे । भतीजे को चौगुना पीटा जाता था ।
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विभूतिभूषण पढ़ने में अच्छे थे । अपना पाठ प्रति दिन याद कर ही लिया करते थे । किन्तु एक दिन उनसे भी प्रमाद हुआ । मास्टर एक –एक लड़के से पाठ पूछते हुये और गलती पर उन्हें पीटते हुये आ रहे थे । विभूतिभूषण डर गये और उन्हें याद आया कि विपत्ति में भगवान् का 'माधव' नाम जपना चाहिये ।
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वे जपने लगे; उनका भतीजा भी चुपके से उनके पास आकर बोला – 'आज तो बचाओ ।' विभूतिभूषण ने उसे भी चुपके से कहा – माधव – माधव जपो ।' ना मालुम मास्टर को क्या सूझा वह दोनों लड़कों को छोड़ कर आगे निकल गया । और फिर छुट्टी का घंटा हो गया । इससे सूचित होता है कि कहीं २ तो नाम जाप का फल प्रत्यक्ष भी देखा जाता है ।
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