शुक्रवार, 20 मार्च 2026

दादूधाम में ‘सन्त साहित्य’ ~

*#daduji*
*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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दादूधाम में ‘सन्त साहित्य’ ~
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उसी दिन मेरा लिखित ‘‘संत सुन्दरदासजी और उनकी वाणी’’ पद्यात्मक  निबन्ध भी विनोबा भावे आदि के सामने मेरे द्वारा पढा गया । उसमें २५ पद्य थे और १८ शीर्षक थे - ‘प्रणति’ १ मनहर । ‘बाल कवि’ १ दोहा । ‘हंस कवि’ दो मनहर । ‘कलाकार’ एक  मनहर । ‘काव्य किला’ एक  मनहर । ‘सिद्ध सिरताज’ एक मनहर । ‘सवैया सरित’ एक  मनहर । ‘सुन्दर सरोज’ एक मनहर । ‘गुरु भक्ति ’ एक रोलाछंद । ‘ईश्‍वर भक्ति ’ एक चौपाई । ‘योग साधन’ एक चौपाई । ‘विद्वता’ एक मनहर । ‘संत शिरोमणि’ एक दोहा । ‘सुन्दर शिक्षा’ एक किरीट सवैया । ‘संबन्ध से इतने धन्य’ एक रोलाछंद । ख्वाणी’ चार मनहर । ‘लेखक का वाणी प्रेम’ एक जलहरन कवित्त । ‘उपसंहार’ चार दोहे थे । 
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अन्त में विनोबा भावे का ओज पूर्ण सुन्दर भाषण हुआ । आज नारायणा तथा आस पास के ग्रामों से लोग भी विनोबा भावे आदि संतों के दर्शन और सत्संग के लिये बहुत आये थे । आज की सभा का कार्य बहुत सुन्दर रहा । दूसरे दिन कार्तिक शु. ९ को सभा कार्य संत साहित्य के प्रेमी वियोगी हरिजी के सभापतित्व में आरंभ हुआ । आज भी अनेक विद्वानों के सुन्दरदासजी तथा उनकी रचनाओं की विशेषताओं की महत्ता का द्योतक सभापति का भाषण हुआ । 
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दोनों दिनों के सभी भाषण सुन्दरदास जी के व्यक्तित्व तथा उनकी रचना के महत्व को बताने वाले होने से सब को ही प्रिय हुये थे । आचार्य प्रकाशदेव जी महाराज के समय ‘सुन्दर जयन्ती’ उत्सव भी एक विशेष महत्व का उत्सव था । उस उत्सव में आने वाले अन्य समाजों के महानुभाव भी आचार्य जी की सौम्य मूर्ति का दर्शन करके अति प्रसन्न हुये थे । 
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आचार्य प्रकाशदेवजी के समय में ही नारायणा दादूधाम के दादू मंदिर को अधिक सुन्दर बनाने का कार्य संपन्न हुआ । जिसकी बाह्य शोभा को देखकर ही दर्शक लोग अति प्रसन्न हो जाते हैं । नारायणा दादूधाम में ‘सन्त साहित्य’ व कलात्मक  संग्रह का कार्य भी आचार्य प्रकाशदेव जी महाराज के समय में ही हुआ । 
(क्रमशः) 

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