मंगलवार, 26 मई 2026

ध्रिगि जीवन मेरे मन

🌷🙏 🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*बखनां~वाणी, संपादक : वैद्य भजनदास स्वामी*
*टीकाकार~ब्रजेन्द्र कुमार सिंहल*
*साभार विद्युत संस्करण~Tapasvi @Ram Gopal Das*
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*दादू निमिष न न्यारा कीजिये, अंतर थैं उर नाम ।*
*कोटि पतित पावन भये, केवल कहतां राम ॥*
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*उपदेश ॥*
*ध्रिगि जीवन मेरे मन राम बिना* । राम बिना यौं गए दिना ॥टेक॥
रैंणि गई त्यूँ दिन भी जाइ । हरि हिरदै कबहूँ नहिं आइ ॥
हार्यौ जनम राम बिण सोये । जे दिन राम भगति बिन खोये ॥
कलि मैं आइ कर्म ये कीया । कहा भयौ जे बहु दिन जीया ॥ 
ध्रिग ते नर ध्रिगि ध्रिगि ते नारी । बषनां हरि की भगति बिसारी ॥१३१॥

हे मेरे मन ! राम-नाम-स्मरण के बिना जीवन को धिक्कार है । राम-नाम-स्मरण के बिना गया हुआ समय यौं =यौंही = व्यर्थ है । जैसे सोने में रात्री व्यतीत हो जाती है वैसे ही काम-धंधे में दिन व्यतीत हो जाता है किन्तु हरि = परात्पर-परब्रह्म-परमात्मा का चिंतन-स्मरण मन में कभी भी करता नहीं है । 
राम-नाम-स्मरण के बिना सोने में ही सारा जीवन व्यतीत कर दिया है । वे दिन व्यर्थ ही गये के समान हैं जिनमें रामजी की भक्ति का संपादन नहीं किया । कलिकाल में भगवन्नामजाप करने मात्र से ही मुक्ति मिल जाती है । कलिकाल में भगवन्नाम करने मात्र से ही मुक्ति मिल जाती है ~
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“कलिजुग केवल नाम अधारा । सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा ॥” 
कलिजुग केवल हरि गुण गाहा । गावत नर पावहीं भव थाहा ॥” 
“कलौ केशव कीर्तनात् ॥” 
“हरेर्नामैव हरेर्नामैव हरेर्नामैवे केवलं ।” 
“कलौ नास्त्यैव नास्त्यैव नास्त्यैव गतिरन्यथा ॥” 
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किन्तु इस सुगम, सरल और निरापद मार्ग का परित्याग करके संसार में आकर नाना बंधनकारी कर्म किये जिनसे मुक्ति का मारग प्रशस्त हो गया । यदि बंधनकारक कर्मों को करते हुए बहुत दिनों तक जिये भी तो उस जीने से क्या लाभ ? उससे तो उल्टे हानि ही होती है । उन पुरुषों व स्त्रियों को भी धिक्कार है जिन्होंने हरि की भक्ति का विस्मरण किया है ॥१३१॥

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