शुक्रवार, 29 मई 2026

*अपना ब्रिद की लाज वही ।*

🌷🙏 🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*बखनां~वाणी, संपादक : वैद्य भजनदास स्वामी*
*टीकाकार~ब्रजेन्द्र कुमार सिंहल*
*साभार विद्युत संस्करण~Tapasvi @Ram Gopal Das*
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*दादू जिन को सांई पाधरा, तिन बंका नांही कोइ ।*
*सब जग रूठा क्या करै, राखणहारा सोइ ॥*
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विनती ॥
*अपना ब्रिद की लाज वही ।* 
अनाथनाथ दीनबंधू, या तेरी निबही ॥टेक॥
हाथि कै हाथि कहा जप माला, का गनिका ब्रत धार्यौ ।
पुत्र हेत हरि नाम लियौ दिज, जम कौ डंड निवार्यौ ॥
हिरदै लिख्यौ लिख्यौ पाटी मैं, राम राम ब्रत धार्यौ ।
गिर तैं गेरि अग्नि मैं डार्यौ, जन प्रहलाद उबार्यौ ॥ 
कस्यौ कबीर कसौटी दीन्हीं, हाथी आगे नाख्यौ ।
जहाँ तहाँ भीड़ पड़ी भगतनि कौं, तहाँ तहाँ पन राख्यौ ॥ 
पतित उधारन बिरद तुम्हारौ, परतंग्या निबही ।
सबल जानि सरनाई आयौ, बषनैं बोट गही ॥१३४॥
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हे परमात्मा ! कहा जाता है, तू अनाथों का नाथ तथा दीनों का बन्धु है । तेरे इस बिड़द की मर्यादा का निर्वाह करने पर ही तेरी प्रतिज्ञा, वचन का निर्वाह होगा । अतः अपने विरुद की मर्यादा का निर्वहन कर । 
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हाथी के हाथ में तेरा नामस्मरण करने के लिये कौनसी माला थी । गणिका ने कौनसा पातिव्रतधर्म धारण किया था । फिर भी तूने उनका उद्धार किया । अजामिल नामक पतित ब्राह्मण ने तेरा नामस्मरण पुत्र के नाम के बहाने से किया था फिर भी तूने उसे यमदंड से बचाकर अपने लोक में बुला लिया था । 
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भक्तप्रवर प्रहलाद ने “राम-राम” अपने हृदय में लिखा था, गुरुमहाराज के यहाँ पढ़ते समय पाटी में भी लिखा था और आजीवन राम-राम रटने का व्रत भी धारण किया था । इससे क्रुद्ध होकर हिरण्यकश्यपु द्वारा उसे पर्वत से गिराया गया, अग्नि में जलाया गया, किन्तु आपने उसका बाल भी बाँका न होने दिया । उसका उद्धार कर दिया ? 
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संतसम्राट कबीर को जंजीरों से बांधकर गंगा में बहाया गया । कुचल डालने के लिए हाथी के आगे डाला गया किन्तु सिंकदरशाह उसका कुछ भी बिगाड़ न सका । 
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हे परमात्मन् ! जब-जब, जहाँ-तहाँ जिस-जिस रूप में भी भक्तों पर संकट आये वहाँ-वहाँ तूने उनके प्रणों का निर्वाह करवाया । “तू पतितों का उद्धार करने वाला है” इस विरुद की महिमा तूने अपनी प्रतिज्ञा का निर्वाह करके सदैव सुरक्षित रखी है । मैं बषनां ने तुझे सबल शरणागतवत्सल जानकर ही तेरी शरण का आश्रय लिया है ॥१३४॥

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