#daduji
卐 सत्यराम सा 卐
*दादू हिन्दू लागे देहुरे, मुसलमान मसीति ।*
*हम लागे एक अलेख सौं, सदा निरंतर प्रीति ॥*
*न तहॉं हिन्दू देवरा, न तहॉं तुरक मसीति ।*
*दादू आपै आप है, नहीं तहॉं रह रीति ॥*
*यहु मसीत यहु देहुरा, सतगुरु दिया दिखाइ ।*
*भीतर सेवा बन्दगी, बाहिर काहे जाइ ॥*
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