#daduji
卐 सत्यराम सा 卐जब समझ्या तब सुरझिया, उलट समाना सोइ ।
कछु कहावै जब लगै, तब लग समझ न होइ ॥
जब समझ्या तब सुरझिया, गुरुमुख ज्ञान अलेख ।
ऊर्ध्व कमल में आरसी, फिर कर आपा देख ॥
दादू आपा उरझे उरझिया, दीसे सब संसार ।
आपा सुरझे सुरझिया, यहु गुरु ज्ञान विचार ॥
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*मंथन* ~ Ashok Kumar Jaiswal
हम जिन चीजों अथवा बातों से भयभीत हो जाते हैं, उन्हें हमारा अवचेतन मस्तिष्क देर-सबेर साकार कर देता है और यूँ हम खुद के निर्मित "भस्मासुर" से बचने के लिए यहाँ-वहाँ भागते फिरते हैं परन्तु जब तक भीतर छुपे भय को हिरण्यकश्यप की भाँति ढूँढकर उसका वजूद समाप्त नहीं कर देगें....इसी तरह आजीवन "कष्टनिवारण-संजीवनी" खोजते-खोजते कस्तूरी-मृग की तरह भागते ही फिरेंगें .... !!
वास्तव में यह एक ध्रुव सत्य है कि समस्या के भीतर ही समस्या का समाधान भी छिपा होता है, जरूरत है तो सिर्फ उसे शांतचित्त होकर खोजने की....न कि समस्या से भयभीत होते रहने की .... !!

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