#daduji
卐 सत्यराम सा 卐
सदा लीन आनन्द में, सहज रूप सब ठौर ।
दादू देखै एक को, दूजा नाहीं और ॥
दादू जहँ तहँ साथी संग है, मेरे सदा अनंद ।
नैन बैन हिरदै रहै, पूरण परमानंद ॥
जागत जगपति देखिये, पूरण परमानंद ।
सोवत भी सांई मिलै, दादू अति आनन्द ॥
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प्रार्थना ~
रात सोते वक्त खयाल रखना। जैसे मंदिर में दंडवत कर रहे हो, ऐसे बिस्तर पर सो जाना। उसी दंडवत के भाव में नींद लग जाऐ। सुबह उठना, तो परिक्रमा का भाव और जो भी करना, उसे उसकी ही सेवा समझना।
ओशो

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