मंगलवार, 14 अक्टूबर 2014

#daduji
卐 सत्यराम सा 卐
दादू नैन न देखे नैन को, अन्तर भी कुछ नाहिं ।
सतगुरु दर्पण कर दिया, अरस परस मिलि माहिं ॥
घट घट रात रतन है, दादू लखै न कोइ ।
सतगुरु सब्दौं पाइये, सहजैं ही गम होइ ॥
जब ही कर दीपक दिया, तब सब सूझन लाग ।
यों दादू गुरु ज्ञान थैं, राम कहत जन जाग ॥

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