#daduji
चौखा बूसर छोटा सुन्दरदास जी को ल्याया -
आवत ताहिं समै जन सेवक, चोखहु बूसर दौसहु ग्रामा ।
सुन्दर बालक साथ लिये तिन्ह, दादु दयालु हिं कीन्ह प्रणामा ।
स्वामिजु भाषत शिष्य सुनें सब, ये जगराम जु संत सुनामा ।
सुन्दर बालक रूप सुहावत, रज्जब राखहु ध्यान सुकामा ॥ २७ ॥
सेवक भक्त ! सुनो यह बालक, पूरब संत जु है जगरामा ।
ईश्वर भक्ति करे जग निर्मल, आप तिरे कुल तारण जामा ।
ज्ञान विज्ञान बखान करे बहु, दर्शन सांख्य वेदान्त उद्दामा ।
बालक शीश धरे गुरु हाथ जु, शिष्य कियो निज दादूरामा ॥ २८ ॥
उसी समय सत्संग सभा में दौसा ग्राम के महाजन चोखालाल जी बूसर आये । उनके साथ एक सुन्दर बालक भी आया । दोनों ने श्री दादूदयाल जी को प्रणाम किया । बालक की तरफ संकेत करके श्री दादूजी ने फरमाया- यह बालक, पूर्वजन्म के संत जगराम जी है । हे रज्जबजी ! आप इनका ध्यान रखते रहना । हे संतों ! यह सुन्दर बालक ईश्वर की सुन्दर भक्ति करेगा, इसकी भक्ति प्रेरणा से जगत् के जीव निर्मल उपदेश पायेंगे । यह स्वयं तो तिरेगा ही, और अपने कुल को भी तार देगा । आध्यात्मिक ज्ञान-विज्ञान का व्याख्यान करके दर्शन, सांख्य, वेदान्तादि शास्त्रों का सारगर्भित विवेचन करेगा । यों कहकर श्री दादूजी ने बालक सुन्दर के शिर पर हाथ धरा, और अपना शिष्य बनाकर राममंत्र का उपदेश दिया । यह प्रसंग गेटोलाव दौसा का है,
प्रथमहि कहू आवती बाता, मोहि मिलाये प्रेमविधाता,
दादू जीवन दोसा आये, बालपने हम दर्शन पाये,
मैं उन चरणन नायो माथा, उन दियो मेरे सिर हाथा,
स्वामी दादू गुरू है मेरा, सुन्दरदास शिष्य तिन केरा ॥ २७-२८ ॥

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