शनिवार, 27 दिसंबर 2014

= ६३ =

#daduji
卐 सत्यराम सा 卐 
४४. उपदेश चेतावनी । पंचम ताल 
मेरी मेरी करत जग खीना, देखत ही चल जावै । 
काम क्रोध तृष्णा तन जालै, तातैं पार न पावै ॥टेक॥ 
मूरख ममता जन्म गमावै, भूल रहे इहिं बाजी । 
बाजीगर को जानत नांही, जन्म गंवावै वादी ॥१॥ 
प्रपंच पंच करै बहुतेरा, काल कुटुम्ब के तांई । 
विषै के स्वाद सबै ये लागे, तातैं चीन्हत नांही ॥२॥ 
येता जिय में जानत नांहीं, आइ कहाँ चल जावै । 
आगे पीछे समझै नांहीं, मूरख यूं डहकावै ॥३॥ 
ये सब भ्रम भान भल पावै, शोध लेहु सो साँई । 
सोई एक तुम्हारा साजन, दादू दूसर नांही ॥४॥
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NP Pathak ~ साभार....
स्वामी शिवानन्द सरस्वती जी | 
सत्संग...... 
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सपेरा साँप के दो विषैले दाँत उखाड देता हैं और उसके साथ निर्भय होकर खेलता हैं | तब भी साँप फन खोलकर फुँफकारता हैं; पर सपेरा जानता हैं की वह उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता | इसी प्रकार आप भी अपने दो विशेले दांतों, अहंता और ममता को उखाड दें, तो फिर इस संसार में आप भी निर्भय होकर रह सकते हैं | आप जीवन्मुक्त बन जायेंगे और अंतरात्मा में आनन्दपूर्वक रहेंगें |

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