#daduji
卐 सत्यराम सा 卐
४४. उपदेश चेतावनी । पंचम ताल
मेरी मेरी करत जग खीना, देखत ही चल जावै ।
काम क्रोध तृष्णा तन जालै, तातैं पार न पावै ॥टेक॥
मूरख ममता जन्म गमावै, भूल रहे इहिं बाजी ।
बाजीगर को जानत नांही, जन्म गंवावै वादी ॥१॥
प्रपंच पंच करै बहुतेरा, काल कुटुम्ब के तांई ।
विषै के स्वाद सबै ये लागे, तातैं चीन्हत नांही ॥२॥
येता जिय में जानत नांहीं, आइ कहाँ चल जावै ।
आगे पीछे समझै नांहीं, मूरख यूं डहकावै ॥३॥
ये सब भ्रम भान भल पावै, शोध लेहु सो साँई ।
सोई एक तुम्हारा साजन, दादू दूसर नांही ॥४॥
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NP Pathak ~ साभार....
स्वामी शिवानन्द सरस्वती जी |
सत्संग......
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सपेरा साँप के दो विषैले दाँत उखाड देता हैं और उसके साथ निर्भय होकर खेलता हैं | तब भी साँप फन खोलकर फुँफकारता हैं; पर सपेरा जानता हैं की वह उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता | इसी प्रकार आप भी अपने दो विशेले दांतों, अहंता और ममता को उखाड दें, तो फिर इस संसार में आप भी निर्भय होकर रह सकते हैं | आप जीवन्मुक्त बन जायेंगे और अंतरात्मा में आनन्दपूर्वक रहेंगें |

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