रविवार, 4 जनवरी 2015

= ८६ =

#daduji
卐 सत्यराम सा 卐
दोष अनेक कलंक सब, बहुत बुरे मुझ मांहि ।
मैं किये अपराध सब, तुम तैं छाना नांहि ॥
गुनहगार अपराधी तेरा, भाजि कहाँ हम जाहिं ।
दादू देख्या शोध सब, तुम बिन कहीं न समाहिं ॥
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Prakash Kejriwal ~
प्रभु जी मेरे औगुण चित न धरो ।
सम दरसी है नाम तिहारो, 
अब मोहिं पार करो ।
प्रभु जी मेरे औगुण चित न धरो 
भाव : संत सूरदास जी कहते हैं, हे प्रभु ! मैं बड़ा गुनाहगार हूँ, गुनाहों से बचना मेरे बस की बात नहीं है, मुझे सिर्फ आपकी बख्शिश का ही सहारा है । आप मुझ पर दया करके मेरे गुनाहों को नज़र अंदाज कर दीजिए । आप सबको एक नजर से अथवा एक आत्मा के स्तर से देखते हैं । जो भी आपको पुकारता है आप उसकी मदद करते हैं मैं भी आपको दिल से पुकार रहा हूँ, आप मुझे हमेशा के लिए मुक्त कर दीजिए। मुझे मोह -माया से बचाइये और अपने चरणों में जगह दीजिए।

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