🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*#श्रीदादूचरितामृत*, *"श्री दादू चरितामृत(भाग-२)"*
लेखक ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज,
पुष्कर, राजस्थान ।*
.
*= विन्दु ७२ =*
*= शिष्य नारायाणदास मांगल्या को उपदेश =*
.
फिर चाटसू में ही एक व्यक्ति नारायण मांगल्या गोत्र के क्षत्रिय भी दादूजी का नाम सुनकर दादूजी के पास आये । दर्शन करके अति प्रसन्न हुये और प्रणाम करके हाथ जोड़े हुये सामने बैठ गये । तब उनके अधिकार के अनुसार दादूजी महाराज ने उनको संकेत करते हुये इस पद से उपदेश दिया ।
.
जाय रे तन जाय रे,
जन्म सफल कर लैहु राम रम,
सुमिर सुमिर गुण गाय रे ॥टेक॥
नर नारायण सकल शिरोमणि,
जन्म अमोलक आहि रे ।
सो तन जाय जगत नहीं जाने,
सकहि तो ठाहर लाइ रे ॥१॥
जरा काल दिन जाय गरासे,
ता सौं कुछ न बसाय रे ।
छिन छिन छीजत जाय मुग्ध नर,
अंतकाल दिन आय रे ॥२॥
प्रेम भक्ति साधु की संगति,
नाम निरंतर गाय रे ।
जे शिर भाग तो सौंज१ सफल कर, दादु विलम्ब न लाय रे ॥३॥
अरे प्राणी ! मैं तुझे बारंबार कह रहा हूं - इस मानव तन के श्वास विषयों में लगकर व्यर्थ जा रहे हैं, तूं बारंबार राम का स्मरण और गुण-गान करते हुये, उन राम में अभेद रूप से रमण करके अपना मनुष्य जन्म सफल कर ले । नर शरीर सब शरीरों में श्रेष्ठ और नारायण की प्राप्ति का हेतु है । अतः यह जन्म अमूल्य है ।
.
यह अमूल्य तन ही विषय उपभोग में व्यर्थ जा रहा है । सांसारिक प्राणी
इस बात को नहीं जानते । जहां तक हो सके इसे शीघ्र ही भजन द्वारा अपने वास्तविक स्थान प्रभु के स्वरूप में ही लगा । वृद्धवस्था इसकी सुन्दरता को तथा काल इसकी आयु के दिनों को ग्रास करता जा रहा है । उस पर तेरी शक्ति कुछ भी काम नहीं देगी ।
.
मूर्ख नर ! यह शरीर क्षण-क्षण में क्षीण होता जा रहा है । इस प्रकार अन्त का दिन आ जायगा । यदि तू मनुष्य शरीर प्राप्ति से अपना अच्छा भाग्य मानता है, तब तो संतों की संगति तथा निरंतर भगवान् का नाम गायन करते हुये प्रेमाभक्ति करके इस नर जन्म रूप सामग्री१ को सफल बनाने में देर मत कर ।
.
उक्त उपदेश से प्रभावित होकर नारायण माँगल्या दादूजी के शिष्य हो गये और दादूजी की साधन पद्धति के अनुसार साधन द्वारा ब्रह्म साक्षात्कार करके कृतार्थ हो गये थे और नारायणदास मांगल्या के नाम से प्रसिद्ध हुये । ये दादूजी के ५२ शिष्यों में हैं । इन्होंने अपना साधन-धाम डांग प्रदेश के एकलोद ग्राम को बनाया था ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें