卐 सत्यराम सा 卐
दादू सोई हमारा सांइयां, जे सबका पूरणहार ।
दादू जीवन मरण का, जाके हाथ विचार ॥
दादू स्वर्ग भुवन पाताल मधि, आदि अंत सब सृष्ट ।
सिरज सबन को देत है, सोई हमारा इष्ट ॥
करणहार कर्त्ता पुरुष, हमको कैसी चिंत ।
सब काहू की करत है, सो दादू का दादू मिंत ॥
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साभार ~ Shatrughna Khetan ~
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एक व्यक्ति एक दिन बिना बताए काम पर नहीं गया..... मालिक ने सोचा, इसका वेतन बढ़ा दिया जाये तो यह और रूचि से काम करेगा..... और उसका वेतन बढ़ा दिया.... अगली बार जब उसको वेतन से ज़्यादा पैसे दिये तो वह कुछ नही बोला चुपचाप पैसे रख लिये..... कुछ महीनों बाद वह फिर अनुपस्थित हो गया...... मालिक को बहुत ग़ुस्सा आया..... सोचा इसका वेतन बढ़ाने का क्या फायदा हुआ यह नहीं सुधरेगा और उस ने बढ़ा हुआ वेतन कम कर दिया और इस बार उसको पहले वाली ही वेतन दिया...... वह इस बार भी चुपचाप ही रहा और मुंह से कुछ ना बोला.... तब मालिक को बड़ा आश्चर्य हुआ.... उसने उससे पूछा कि जब मैने तुम्हारे अनुपस्थित होने के बाद तुम्हारा वेतन बढा कर दिया तुम कुछ नही बोले और आज तुम्हारी अनुपस्थित पर वेतन कम कर के दिया फिर भी मौन ही रहे.....!! इस की क्या कारण है..?
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उसने उत्तर दिया.... जब मै पहले अनुपस्थित हुआ था तो मेरे घर एक बच्चा पैदा हुआ था....!! आपने मेरा वेतन बढ़ा कर दिया तो मै समझ गया..... परमात्मा ने उस बच्चे के पोषण का हिस्सा भेज दिया है...... और जब दोबारा मै अनुपस्थित हुआ तो मेरी माता जी का निधन हो गया था... जब आप ने मेरा वेतन कम दिया तो मैने यह मान लिया कि मेरी माँ अपने हिस्से का अपने साथ ले गयीं..... फिर मै इस वेतन के लिए क्यों दुखी होऊँ जिस का उत्तरदायित्व स्वयं परमात्मा ने ले रखा है......!!
एक सुन्दर सोच :
अगर कोई पूछे जिंदगी में क्या खोया और क्या पाया, तो निसंकोच कहना, जो कुछ खोया वो मेरी मूर्खता थी और जो भी पाया वो प्रभू का आशीर्वाद था, प्यारा सम्बन्ध है मेरा और भगवान के बीच में, अधिक मैं मांगता नहीं और कम वो देता नहीं.....

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