卐 सत्यराम सा 卐
धन्य धन्य तूँ धन्य धणी,
तुम्ह सौं मेरी आइ बणी ॥ टेक ॥
धन्य धन्य तूँ तारे जगदीश,
सुर नर मुनिजन सेवैं ईश ।
धन्य धन्य तूँ केवल राम,
शेष सहस्र मुख ले हरि नाम ॥ १ ॥
धन्य धन्य तूँ सिरजनहार,
तेरा कोई न पावै पार ।
धन्य धन्य तूँ निरंजन देव,
दादू तेरा लखै न भेव ॥ २ ॥
टीका ~ ब्रह्मऋषि सतगुरुदेव आशीर्वादात्मक मंगल दिखा रहे हैं कि हे सत्यरूप परमेश्वर! आपको धन्य है । हे चेतन रूप परमेश्वर ! आपको धन्य है । हे आनन्द स्वरूप परमेश्वर ! आपको धन्य है । आप ही हमारे अधिष्ठान रूप स्वामी हो । आप से ही हमारी, अबके गुरु उपदेश द्वारा बात बनी है । हे जगत् के ईश्वर ! अपने आत्मीय जनों को इस संसार से आप ही तारने वाले हो । आपको धन्य है, धन्य है । हे नाथ ! आपको सुर - देवता, नर - नारद आदि मुनिजन, हे ईश्वर ! ये सभी आपकी सेवा में लग रहे हैं । हे शुद्ध स्वरूप निर्गुण राम ! आपको धन्य है, धन्य है । शेष जी भी एक हजार मुख और दो हजार जिह्वाओं से आपके नामों का उच्चारण करते हैं । हे सिरजनहार ! सबकी उत्पत्ति, पालन, संहार के करने वाले प्रभु, आपको धन्य है धन्य है । आपके स्वरूप और नामों का किसी ने पार नहीं पाया है । हे निरंजन देव ! आपको धन्य है, धन्य है । हम आपके स्वरूप का पूर्णतया भेद नहीं पा सके हैं ।
श्री दादूवाणी
चित्र सौजन्य ~ Chetna Kanchan Bhagat

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