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🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
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*सर्वांगयोगप्रदीपिका१ (ग्रंथ२)*
*भक्तियोग नामक द्वितीय उपदेश*
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*राम मन्त्र के ऐसै कामा ।*
*पत्र न उठ्यौ लिख्यौ जब नामा ।*
*राम मन्त्र शिव गौरि सुनायौ ।*
*सोई नारद ध्रुवहिं पढायौ ॥२१॥*
इस राममन्त्र के प्रभावशाली कार्यों में से कुछ का वर्णन यों है- सुनते हैं सन्त नामदेवजी ने एक पत्ते पर यह मन्त्र लिख दिया तो अच्छे-अच्छे पहलवानों से भी नहीं उठा । इसी राममन्त्र से भगवान् शिव ने आदिशक्ति रूपा भगवती पार्वती को दीक्षित किया था । वही मन्त्र नारदमुनि ने भक्तिों के सिरमौर ध्रुव को भगवत्प्राप्ति के लिये बताया था ॥२१॥
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*पुनि प्रहलाद गह्यौ सो मंत्रा ।*
*सही कसौटी काढे जंत्रा ।*
*जरे न मरे खड्ग की धारा ।*
*राम मन्त्र के ये उपकारा ॥२२॥*
फिर भक्त प्रह्लाद ने भी इसी मन्त्र के प्रभाव से अपनी भक्ति के द्वारा भगवान् को स्नेहवश नृसिंहरूप में प्रकट होने को विवश कर दिया था । भक्त प्रह्लाद ने इस मन्त्र की साधना में हिरण्याक्ष द्वारा दिये गये कितने-कितने दु:सह कष्ट सहे-यह सभी भक्त जानते हैं । उनको उनके दुष्ट पिता ने जीते जलाने का प्रयास किया, गुण्डों के द्वारा तलवार से उन्हें मरवाने की कोशिश की, पर न वे जल पाये, न कट पाये । यह सब राममन्त्र का ही प्रभाव(उपकार) था ॥२२॥
(क्रमशः)

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