🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
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*दोहा*
*यह सो भक्ति अलिंगनी, बिरला जानै भेव ।*
*भाग्य होइ तौ पाइये, समझावै गुरुदेव ॥१५॥*
यही निर्गुण भक्ति(निराकारोपासना) है । इसका भेद(वास्तविक ज्ञान) कोई विरला ही भक्त जानता है । गुरुदेव कहते हैं कि इस निराकार-उपासना की चरम साधना कोई भाग्यशाली साधक ही कर सकता है ॥१५॥
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*(२) अथ मन्त्रयोग*
*चौपई*
*मन्त्रयोग अब सुनियहु भाई ।*
*सतगुरु बिना न जान्यौं जाई ।*
*जाकै कछू रूप नहिं रेखा ।*
*कौन प्रकार जाइ सो देखा ॥१६॥*
हे शिष्य ! अब मन्त्रयोग के विषय में सुनो जो बिना गुरु की कृपा के सम्यक्तया नहीं जाना जा सकता । जिसका न कोई रूप है, न आकार है उसका साक्षात्कार किस तरह किया जा सकता है ? ॥१६॥
(क्रमशः)

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